चैत्र माह की पूर्णिमा को यानि की आज हनुमान जयंती श्रद्धा और भक्तिभाव से मनाई जाएगी। वैसे तो वर्ष भर में दो बार हनुमान जयंती का पर्व मनाया जाता है, कहीं चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को तो कहीं कार्तिक मास की चतुर्दशी तिथि को हनुमान जयंती के रूप में मनाई जाती है। वहीं तमिलनाडु और केरल में हनुमान जन्मोत्सव मार्गशीर्ष माह की अमावस्या को तो उड़ीसा में वैशाख माह के पहले दिन मनाई जाती है। माना जाता है कि इस दिन हनुमानजी का जन्म हुआ था। हनुमानजी इकलौते ऐसे देवता हैं, जो आज भी पृथ्वी पर वास करते हैं और अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। हनुमान जी को कलयुग में सबसे प्रभावशाली देवताओं में से एक माना जाता है। भगवान के प्रति उनकी अटूट भक्ति और अपार शक्ति के लिए जाने वाले हनुमान साहस, निस्वार्थ सेवा और भक्ति के प्रतीक हैं। उनकी पूजा करने से जीवन की सारी बाधाएं दूर होती हैं और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा मिलती है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के सर्वोत्तम सेवक, सखा, सचिव और भक्त हनुमान जी थे। जहां भी श्रीराम की आराधना होती है, हनुमान का स्मरण अपने आप हो आता है। वे सद्गुणों के भंडार थे। उनकी पूजा पूरे भारत और दुनिया के अनेक देशों में इतने अलग-अलग तरीकों से की जाती है कि उन्हें जन देवता की संज्ञा दी जा सकती है। इन्द्र के वज्र से हनुमानजी की ठुड्डी टूट गई थी। इसलिए उनको हनुमान का नाम दिया गया। श्री हनुमान अतुल बल के स्वामी थे। उनके अंग वज्र के समान शक्तिशाली थे। इसलिए उन्हें वज्रांग नाम दिया गया, जो बोलचाल में बजरंग बन गया। इसके अलावा वे अनेक नामों से प्रसिद्ध है, जैसे अंजनीसुत, वायुपुत्र, महाबल, रामेष्ट, बजरंगबली, मारुति, पवनपुत्र, संकटमोचन, केसरीनन्दन, महावीर आदि। वे पराक्रम, ज्ञान और सेवा के आदर्श संगम थे। ज्ञान, भक्ति और कर्म इन तीन क्षेत्रों में हनुमान जी महान योगी थे।

