Monday, July 13, 2026 |
Home Tech Worldअनुसंधान और नवाचार को आसान बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध, उद्योग और शोध संस्थानों के बीच तालमेल बढ़ाने पर ज़ोर

अनुसंधान और नवाचार को आसान बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध, उद्योग और शोध संस्थानों के बीच तालमेल बढ़ाने पर ज़ोर

by Business Remedies
0 comments
Jitendra Singh Addressing RISE Conclave 2026 On Research, Innovation And Indigenous Technology

भारत अब ऐसे दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां वैज्ञानिक प्रगति का मूल्यांकन केवल शोध या नई खोजों के आधार पर नहीं, बल्कि उसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव के आधार पर भी किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार का मानना है कि अनुसंधान का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब उसका लाभ आम लोगों, उद्योगों और देश की अर्थव्यवस्था तक प्रभावी रूप से पहुंचे। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रयोगशालाओं, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा, ताकि नवाचार केवल प्रारंभिक परीक्षण तक सीमित न रहें, बल्कि बड़े स्तर पर अंतिम उपयोगकर्ताओं तक पहुंच सकें।

उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा नवाचार तंत्र विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जो अनुसंधान, उद्योग और उद्यमिता के बीच मजबूत सेतु का कार्य करे। इस दौरान उन्होंने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से सार्वजनिक वित्तपोषित शोध संस्थानों के साथ कार्य करने में आने वाली चुनौतियों को खुलकर साझा करने का आग्रह किया, ताकि उन समस्याओं का व्यावहारिक समाधान निकाला जा सके। बेंगलुरु में आयोजित RISE Conclave 2026 के दौरान उद्योग जगत के साथ संवाद करते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि सार्वजनिक धन से विकसित स्वदेशी प्रौद्योगिकियों तक उद्योगों की पहुंच आसान बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने जानकारी दी कि सीएसआईआर प्रौद्योगिकी प्रदर्शन पोर्टल पर वर्तमान में 800 से अधिक स्वदेशी प्रौद्योगिकियां उपलब्ध हैं। यह मंच उद्योगों, उद्यमियों और स्टार्टअप्स को अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी समाधान खोजने तथा नई प्रौद्योगिकियों को तेजी से अपनाने का अवसर प्रदान करता है। डॉ. सिंह ने कहा कि उद्योगों की भागीदारी किसी प्रौद्योगिकी के पूरी तरह विकसित होने के बाद नहीं, बल्कि अनुसंधान परियोजना की प्रारंभिक अवधारणा से ही शुरू होनी चाहिए। इससे वैज्ञानिक अनुसंधान को बाज़ार की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप दिशा मिलेगी, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अधिक प्रभावी होगा और व्यावसायिक सफलता की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

उन्होंने शोध संस्थानों, उद्योगों और स्टार्टअप्स के बीच गहरे सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि वैज्ञानिक ज्ञान को बाज़ार के लिए तैयार उत्पादों में बदलना और उसे राष्ट्रीय विकास से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। डॉ. सिंह ने सीएसआईआर की विभिन्न प्रयोगशालाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि सार्वजनिक निवेश से तैयार की गई अत्याधुनिक वैज्ञानिक सुविधाओं का उपयोग साझा मंच के रूप में किया जाना चाहिए, ताकि उभरते क्षेत्रों में कार्य कर रहे नवाचारकर्ताओं और उद्योगों को भी इनका लाभ मिल सके।

उन्होंने बताया कि देश में स्थापित लिथियम बैटरी निर्माण सुविधा प्रतिदिन लगभग 1,000 सेल बनाने की क्षमता रखती है। यह उदाहरण दर्शाता है कि वैज्ञानिक आधारभूत ढांचा स्थापित उद्योगों के साथ-साथ नए उद्यमों को भी स्वदेशी तकनीकी क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर सकता है। मंत्री ने यह भी कहा कि अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में कार्य कर रहे स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष इनक्यूबेशन तंत्र विकसित किए जा रहे हैं। इससे नए उद्यमों को अनुसंधान, तकनीकी सहयोग और आवश्यक संसाधन उपलब्ध होंगे, जिससे देश में नवाचार को नई गति मिलेगी और आत्मनिर्भर तकनीकी विकास को मजबूती प्राप्त होगी।



You may also like

Leave a Comment