• वर्षा ऋतु में एकत्रित Giloy औषधीय रूप से सर्वाधिक प्रभावी
• अब समय आ गया है कि हम, हमारे ग्रंथों में लिखित कथनों को अन्धविश्वास न समझ, उनमें छिपे वैज्ञानिक दृष्टिकोण को पहचाने – Acharya Balkrishna
हरिद्वार, 12 नवंबर :- Patanjali के वैज्ञानिकों ने एक अभूतपूर्व शोध करते हुए यह सत्यापित किया है कि वर्षा ऋतु में एकत्रित Giloy औषधीय रूप से अधिक प्रभावी है।
इस अवसर पर Acharya Balkrishna ने कहा कि यह सोचने की बात है कि क्यों प्रकृति से जुड़े हमारे त्यौहार Harela और Jadi-booti Divas विशेष ऋतु में ही मनाए जाते हैं? क्यों हमारे आयुर्वेदिक ग्रंथों में लिखा गया है कि किस पौधे के किस हिस्से को कौन-सी विशेष ऋतु में एकत्रित करना चाहिए? क्या इसका कोई वैज्ञानिक आधार है, या यह हमारे पूर्वजों की एक छद्म कल्पना मात्र है?
इस शोध के माध्यम से Patanjali के वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिया है कि सनातन ग्रंथों में लिखित ऋषि-मुनियों के विचार, भारतीय संस्कृति से जुड़े त्यौहार, मात्र हमारे पूर्वजों की कपोल कल्पना नहीं, उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण निहित था, जो भविष्य की पीढ़ियों को ध्यान में रखकर लिखा गया था।
अब समय आ गया है कि हम प्रकृति की ओर लौटें, सनातन संस्कृति की ओर लौटें, और हमारे ग्रंथों में लिखित कथनों को अन्धविश्वास न समझ, उनमें छिपे वैज्ञानिक दृष्टिकोण को पहचाने।
इस अवसर पर Patanjali के प्रमुख वैज्ञानिक Dr. Anurag Varshney ने कहा कि आयुर्वेद के अनुसार औषधीय पौधों की प्रभावशीलता उसमें विद्यमान Phytochemical पर निर्भर करती है, जो मौसम के साथ बदलता है। यह शोध उस पारंपरिक ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत करता है। उन्होंने आगे कहा कि जड़ी-बूटियों का सही समय पर एकत्रीकरण न केवल उनके औषधीय प्रभाव को बढ़ाएगा अपितु आयुर्वेदिक औषधियों की गुणवत्ता को सुधारने में भी सहायक होगा।
आयुर्वेद की अमर औषधि मानी जाने वाली Giloy पर Patanjali द्वारा किए इस वैज्ञानिक शोध में वैज्ञानिकों ने अथक परिश्रम कर दो वर्षों तक Giloy को एकत्र किया।
इस शोध में UHPLC-PDA और HPTLC तकनीक के माध्यम से Giloy का रासायनिक विश्लेषण किया गया, जिसमें इस तथ्य की पुष्टि हुई कि वर्षा ऋतु में एकत्रित Giloy अधिक प्रभावी और गुणवत्ता युक्त है।
यह शोध Springer Nature के रिसर्च जर्नल BMC Plant Biology में प्रकाशित हुआ है।
हमारे आयुर्वेदिक ग्रंथों में लिखित कथन के प्रत्यक्ष प्रमाण को विस्तारपूर्वक जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें:
https://bmcplantbiol.biomedcentral.com/articles/10.1186/s12870-025-07532-4

