मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने भारत के जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट को सीधे झटका दिया है, क्योंकि खाड़ी देश कुल एक्सपोर्ट का लगभग 25 फीसदी हिस्सा लेते हैं। दुबई दुनिया का बड़ा डायमंड और बुलियन हब है। मार्च, 2026 में इस क्षेत्र को होने वाले निर्यात में करीब 57.95 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है। मार्च, 2026 में भारत के समग्र रत्न और आभूषण निर्यात में 35.23 फीसदी की कमी आई है। रत्न और आभूषण निर्यात में नुकसान होने की आशंका है। अभी स्थिति चुनौतीपूर्ण है और अल्पकाल में निर्यात में और गिरावट आ सकती है, पर उद्योग विशेषज्ञ इसे एक अस्थायी झटका मानते हैं। यदि निर्यातक अपने बाजारों में विविधता लाते हैं और नए विकल्पों को तलाशते हैं, तो वे इस स्थिति से उबर सकते हैं। संघर्ष के कारण समुद्री और हवाई मार्ग बाधित होने से लॉजिस्टिक्स और शिपिंग की लागत बढ़ गई है। बीमा प्रीमियम में रिकॉर्ड बढ़ोतरी ने शिपमेंट को धीमा कर दिया है। दुबई और इजराइल, जो भारतीय गहनों के प्रमुख केंद्र हैं, वहां आपूर्ति श्रृंखला रुकने से सूरत और मुंबई में हीरा पॉलिशिंग उद्योग पर गहरा असर पड़ा है। तनाव के लंबा खिंचने के कारण निर्यातकों को केवल मध्य पूर्व या अमेरिका पर निर्भर ना रहकर नए बाजारों जैसे सऊदी अरब, कतर और दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर रुख करना चाहिए। दुबई के माध्यम से माल भेजने के बजाय सीधे अन्य देशों में शिपिंग के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशने चाहिए। फिलहाल लैब-ग्रोन हीरों का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है। भारतीय निर्यातक इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर सकते हैं, क्योंकि इसमें मार्जिन बेहतर है। भारत और यूएई के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते का उपयोग करते हुए, वहां के माध्यम से अन्य देशों में व्यापार बढ़ाने के अवसर तलाशे जा सकते हैं। इसके अलावा बी2सी मॉडल अपनाकर सीधे वैश्विक ग्राहकों तक पहुंचने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग करना चाहिए।

