आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। यह वाक्य पिछले दो दशकों से हमारे कानों में गूंजता आ रहा है। जब भी कोई आतंकी हमला होता है, जब निर्दोष लोग बम धमाकों में मरते हैं। अगर आतंक का कोई धर्म नहीं होता तो वह हर बार एक ही धर्म के श्रद्धालुओं को क्यों निशाना बनाता है? अब समय आ गया है कि आतंकवाद के खात्मे के लिए भारत को उसकी जड़ पर वार करना होगा। धरती का स्वर्ग कहा जाने वाला कश्मीर काफी समय से आतंकवाद से जूझ रहा है। समय-समय पर केंद्र सरकार की ओर से कश्मीर में आप्रेशन ऑल आऊट चलाया जाता है, लेकिन फिर भी आतंकवादियों पर कोई लगाम नहीं लग पा रही है। गत दिवस ही आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम (बैसरन) में निहत्थे पर्यटकों को निशाना बनाया है। आतंकियों ने नाम पूछकर गैर मुस्लिमों को गोली मारी गई। वहीं अमरनाथ यात्रा से पहले यह कायराना कृत्य आतंकी हमला इस यात्रा में बाधा डालने का प्रयास है। यह हमला उस वक्त हुआ है, जब कश्मीर में पर्यटक सीजन शुरू है, पर्यटकों की आवक बनी हुई है। अमरीकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस सपरिवार चार दिवसीय दौरे पर भारत आए हुए हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब के दौरे पर थे, जो वापस लौट आए हैं और देश में वक्फ बोर्ड को लेकर विवाद चल रहा है। जहां जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर ही निर्भर है। न सिर्फ यहां प्रति वर्ष होने वाली अमरनाथ यात्रा में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। वहीं पर्यटन के मौसम में बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। इसके परिणामस्वरूप यहां के घोड़े, पि_ू व पालकी वालों, शिकारा चलाने वालों और होटल मालिकों को भारी कमाई होती है। इस घटना के परिणामस्वरूप राज्य में पर्यटन को भारी आघात लगेगा और राज्य में जारी विकास गतिविधियों को ठेस पहुंचेगी। इस हमले से डल झील में शिकारा आदि में की गई तमाम बुकिंग भी प्रभावित होगी, जिससे स्थानीय लोगों की ही आय और रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

