हर वर्ष 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन 1975 में Emergency (आपातकाल) के दौरान हुए संवैधानिक उल्लंघन और लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या की याद दिलाता है। 1975 की इसी तारीख को, तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi द्वारा देश में 18 महीनों का आपातकाल घोषित किया गया था। इस दिन को मनाने का उद्देश्य उन लाखों नागरिकों को श्रद्धांजलि देना है, जिन्हें बिना अपराध के जेलों में बंद कर दिया गया था, और जिनकी स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आवाज को बेरहमी से कुचल दिया गया था। पत्रकारों, नेताओं, शिक्षकों और आम नागरिकों को सरकारी दमन झेलना पड़ा।
पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने 25 जून को आधिकारिक रूप से संविधान हत्या दिवस घोषित किया था। इसका उद्देश्य है कि भविष्य में कोई भी सत्ता तंत्र नागरिक स्वतंत्रता का दमन न कर सके। यह दिन भारतवासियों को यह भी याद दिलाता है कि लोकतंत्र के मूल्यों और नागरिक अधिकारों की रक्षा हर नागरिक का कर्तव्य है। संविधान हत्या दिवस न केवल एक ऐतिहासिक चेतावनी है, बल्कि यह नागरिकों में लोकतांत्रिक चेतना को बनाए रखने और किसी भी तानाशाही प्रवृत्ति को पहचानने की सजगता भी पैदा करता है। यह day हमें स्वतंत्रता के मूल्य को समझने और उसकी रक्षा के लिए एकजुट होने की प्रेरणा देता है।
भारत में लोकतंत्र, एक राजनीतिक व्यवस्था से कहीं अधिक है। यह भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक ताने-बाने में बेहद गहराई से समाया हुआ एक सभ्यतागत लोकाचार है। संविधान हत्या दिवस न केवल अतीत में हुए अन्याय की याद दिलाता है, बल्कि लोकतांत्रिक सिद्धांतों, संस्थाओं की अखंडता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की पुरज़ोर तरीके से पुष्टि करता है। आइए हम एक राष्ट्र के रूप में एकजुट होकर अपने लोकतंत्र की नींव की रक्षा करने के अपने संकल्प को दोहराएं और लोकतंत्र की राह पर चलने की प्रतिज्ञा लें।

