जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जन्म दिवस पर हर वर्ष आज के दिन महावीर जयंती मनाई जाती है। उनका जीवन जैन समुदाय के लिए ही नहीं बल्कि मानवता के लिए प्रेरणादायक है। उनके आदर्शों और सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश यह पर्व देता है। भगवान महावीर ने अपने जीवन में जो शिक्षाएं दीं, वे आज भी समाज को नैतिकता, करुणा और अहिंसा की राह पर चलने के लिए प्रेरित करती है। भगवान महावीर स्वामी ने ३० वर्ष की आयु में राजसी जीवन त्याग कर संन्यास लिया और आत्मज्ञान की खोज में जंगलों में चले गए। महावीर स्वामी का मुख्य संदेश अहिंसा परमो धर्म यानि अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है। आज के समय में जबकि दुनिया में हिंसा और अशांति बढ़ रही है, ऐसे वक्त में महावीर स्वामी के सिद्धांत और भी प्रासंगिक हो गए है।
वहीं गत दिवस ९ अप्रैल को जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जीतो) के आह्वान पर विश्व के १०८ देशों के लाखों लोगों ने आत्मा और आवाज में एकजुट होकर विश्व कल्याण एवं शांति के लिए नवकार महामंत्र दिवस मनाया। उन्होंने नम्रता, अहिंसा और आत्म-अनुशासन का उत्सव मनाने के लिए जैन धर्म के पवित्र मंत्र का जाप किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उद्घाटित कार्यक्रम में अभूतपूर्व भागीदारी देखी गई, जिसने सीमाओं और पीढिय़ों से परे एकता को दर्शाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने नवकार मंत्र को आंतरिक शक्ति और सार्वभौमिक कल्याण का कालातीत स्रोत बताया। उन्होंने इसे आज की तेज रफ्तार दुनिया में अत्यधिक प्रासंगिक बताते हुए कहा कि नैतिक स्पष्टता, संयम और करुणा, ये सभी प्रभावी नेतृत्व के मूल आधार बनते जा रहे हैं। भगवान महावीर की शिक्षाओं को दोहराते हुए उन्होंने नागरिकों और संस्थाओं से अहिंसा (हिंसा से परहेज), अनेकांतवाद (विविध दृष्टिकोणों की स्वीकृति) और अपरिग्रह (असंग्रह) को अपनाने का आह्वान किया।

