नालंदा विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक पुनरुद्धार के बाद बिहार अब एक और प्राचीन शिक्षा केेंद्र—विक्रमशिला विश्वविद्यालय—को पुनर्जीवित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। 8वीं शताब्दी में पाल वंश की ओर से स्थापित विक्रमशिला 12वीं शताब्दी तक बौद्ध शिक्षा का एक प्रसिद्ध केंद्र था, जब इसे नष्ट कर दिया गया था।
केंद्र सरकार ने इसके पुनरुद्धार के लिए 500 करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की थी, लेकिन भूमि अधिग्रहण संबंधी बाधाओं के कारण प्रगति धीमी रही है। यदि इसे सफलतापूर्वक बहाल किया जाता है, तो विक्रमशिला बिहार को एक वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में पुन: स्थापित कर सकता है। अंतरराष्ट्रीय विद्वानों को आकर्षित कर सकता है और पर्यटन को बढ़ावा दे सकता है। हालांकि, नालंदा के पुनरुद्धार से सीखे गए सबक यह दर्शाते हैं कि कुशल प्रशासन, पारदर्शी कार्यान्वयन और वैश्विक सहयोग आवश्यक हैं। इस परियोजना में पुरातात्विक विरासत के संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, साथ ही आधुनिक शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप इसे विकसित करना होगा। बिहार के पास अपनी बौद्धिक विरासत को पुन: स्थापित करने का एक दुर्लभ अवसर है। नालंदा के साथ-साथ विक्रमशिला का पुनरुद्धार भारत को एक बार फिर ज्ञान की महाशक्ति बना सकता है। अब यह नीति निर्माताओं पर निर्भर है कि वे इस सपने को साकार करें।

