भारत का लगातार मेक इन इंडिया का विजन साकार होता नजर आ रहा है। रक्षा और सेमिकंडक्टर (चिप्स) के क्षेत्र में भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। वहीं अब भारत ने लैपटॉप और आईटी हार्डवेयर इंडस्ट्री में मेक इन इंडिया के तहत जबरदस्त प्रगति की है, जिसमें 40 से अधिक प्रमुख कंपनियों ने उत्पादन के लिए पंजीकरण कराया है। सरकार की पीएलआई योजना के चलते भारत वैश्विक लैपटॉप विनिर्माण का हब बन रहा है और अगले कुछ वर्षों में 100 फीसदी स्थानीय उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। जहां प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव योजना के 2.0 संस्करण से 40 से अधिक कंपनियों ने भारत में लैपटॉप, टैबलेट और सर्वर बनाने के लिए पंजीकरण कराया है। सैमसंग और लेनोवो जैसी कंपनियां भारत में ही लैपटॉप असेम्बल करना शुरू कर चुकी हैं, जिससे आयात निर्भरता कम हो रही है। चेन्नई (तमिलनाडु) में सिर्मा एसजीएस जैसी उन्नत असेम्बली लाइनें स्थापित की गई हैं, जो इस क्षेत्र को एक बड़ा विनिर्माण केंद्र बना रही हैं। भारत का उद्देश्य वैश्विक लैपटॉप उत्पादन का 30 फीसदी हिस्सा हासिल करना है, जिससे देश एक प्रमुख निर्यातक बन सके। स्थानीय उत्पादन बढऩे से चीन से आयात में बड़ी कटौती की जा रही है, जो सुरक्षा और आर्थिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। सरकार केवल असेम्बली ही नहीं, अब स्थानीय स्तर पर चिप्स और अन्य पुर्जे बनाने पर भी जोर दे रही है, जो वर्ष, 2030 तक 70 फीसदी तक स्वदेशी हो सकते हैं। मेक इन इंडिया की यह पहल लाखों नौकरियां पैदा कर रही है और एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा दे रही है। वर्ष, 2030 के बीच मेक इन इंडिया लैपटॉप के क्षेत्र में बेहद सफल रहने की उम्मीद है, बशर्ते देश में बुनियादी ढांचे और कुशल कार्यबल का विकास बना रहे।

