अगले माह ही केंद्र का बजट पेश होगा। बजट से पहले ही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है। दुनियाभर के ज्यादातर मुख्य अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वर्ष, 2025 में वैश्विक आर्थिक स्थिति कमजोर रहेगी। पर भारत में कुछ सुस्ती के संकेतों के बावजूद मजबूत वृद्धि की स्थिति बने रहने की उम्मीद है। पिछले दिनों ही जारी विश्व आर्थिक मंच की ओर से कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को इस साल महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं सर्वेक्षण में 56 फीसदी अर्थशास्त्रियों ने स्थिति कमजोर रहने की आशंका जताई है। केवल 17 फीसदी अर्थशास्त्रियों ने सुधार की उम्मीद जताई है। यह प्रमुख क्षेत्रों में बढ़ती अनिश्चितता और दुनियाभर में जरूरत के मुताबिक नीतिगत कदमों की आवश्यकता को बताता है। वर्ष, 2025 में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूत वृद्धि की उम्मीद है। इसके अलावा दक्षिण एशिया, विशेष रूप से भारत में भी मजबूत वृद्धि बने रहने की उम्मीद है। यूरोप के लिए परिदृश्य निराशाजनक बना हुआ है। 74 फीसदी प्रतिभागियों ने इस वर्ष कमजोर या बहुत कमजोर वृद्धि की उम्मीद जताई है। वहीं डब्ल्यूईएफ ने कहा कि चीन के लिए भी दृष्टिकोण कमजोर बना हुआ है और आने वाले वर्षों में वृद्धि धीरे-धीरे धीमी होने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार वृद्धि के लिहाज से दक्षिण एशिया लगातार आगे बना हुआ है। 61 फीसदी मुख्य अर्थशास्त्रियों को वर्ष, 2025 में मजबूत या बहुत मजबूत वृद्धि की उम्मीद है। इसमें कहा गया कि क्षेत्र में यह प्रदर्शन काफी हद तक भारत में मजबूत वृद्धि का नतीजा है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। हालांकि, वर्तमान में कुछ सुस्ती के संकेत हैं। भारत के लिए नवीनतम राष्ट्रीय लेखा आंकड़ों के अनुसार वर्ष,2024 की तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 5.4 फीसदी रहने का अनुमान है। यह लगभग दो साल में वृद्धि की सबसे धीमी रफ्तार है। परिस्थितियों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने 2024-25 के लिए वृद्धि दर के अनुमान को घटाया है। उपभोक्ता मांग में कमी और कमजोर उत्पादकता के बीच चीन में सुस्ती का अनुमान है। यह वैश्विक सुधार की असमान और अनिश्चित प्रकृति को दर्शाता है।

