शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती और राष्ट्रीय शिक्षा दिवस आज मनाया जाएगा। जो शिक्षा के विकास में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए मनाया जाता है। इस दिन का महत्व शिक्षा को बढ़ावा देने और समावेशी और प्रगतिशील समाज के निर्माण में इसके महत्व पर जोर देना है। यह दिन शिक्षा की भूमिका को उजागर करता है, जो समाज को आकार देने और व्यक्तियों को महत्वपूर्ण सोच और सकारात्मक योगदान के लिए सशक्त बनाने के लिए आवश्यक है। यह दिवस एक प्रगतिशील और समावेशी भारत को आकार देने में शिक्षा के महत्व पर जोर देता है। 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय वर्ष, 2008 में लिया गया था। मौलाना अबुल कलाम आजाद ने स्वतंत्रता के बाद भारत में महिला शिक्षा को बढ़ावा देने और शैक्षिक नीतियों का आधुनिकीकरण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आजाद एक दूरदर्शी विद्वान थे, उन्होंने 1950 के दशक में ही सूचना और तकनीक के क्षेत्र में शिक्षा पर ध्यान देना शुरू कर दिया। उन्होंने देश में आधुनिक शिक्षा पद्धति के लिए उल्लेखनीय कदम उठाए। शिक्षामंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल में ही भारत में तकनीकी के महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का गठन किया गया। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और सेकेंडरी एजुकेशन कमीशन भी उन्हीं के कार्यकाल में स्थापित किया गया। जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की स्थापना में भी उनका अहम योगदान रहा। मौलाना आजाद महिलाओं और वंचित वर्ग की शिक्षा के खास पक्षधर थे। उनकी पहल पर ही भारत में 1956 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना की गई। 2 फरवरी, 1958 को राष्ट्रीय एकता के पैगम्बर और आजादी के इस महानायक ने दिल्ली में अंतिम सांस ली। स्वाधीनता आंदोलन और सार्वजनिक जीवन में अविस्मरणीय योगदान के लिए वर्ष,1992 में उन्हें ‘भारत रत्न’(मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया था।

