बढ़ती जनसंख्या और समाज, राष्ट्र और पर्यावरण पर इसके प्रभाव के बारे में जागरूकता फैलाने और इसे नियंत्रित कर लोगों को शिक्षित करने के लिए आज विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाएगा। यह दिवस तब अस्तित्व में आया जब वर्ष,1987 में विश्व की जनसंख्या 500 करोड़ तक पहुंच गई थी। इसका उद्देश्य लोगों को जनसंख्या से जुड़े मुद्दों जैसे परिवार नियोजन के लाभ, लैंगिक समानता, गरीबी, मातृ स्वास्थ्य, मानवाधिकार के बारे में शिक्षित करना रहा है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य स्वस्थ समाज के लिए इसके बढ़ते खतरे को रोकने और आने वाली पीढ़ी के लिए बेहतर और टिकाऊ भविष्य प्रदान करने के लिए लोगों में अधिक जनसंख्या से जुड़े जोखिम के बारे में जागरूकता फैलाना है।जहां एक ओर बढ़ती जनसंख्या संसाधनों पर दबाव डालती है और यह दिवस संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन के महत्व को उजागर करता है। यह दिन गरीबी और असमानता को कम करने में जनसंख्या वृद्धि के प्रभाव पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित करता है। वहीं यह दिन जनसंख्या रुझानों और भविष्य की पीढिय़ों के लिए योजना बनाने के महत्व पर विचार करने का अवसर प्रदान करता है। संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग के अनुसार यद्यपि आने वाले दशकों में वैश्विक जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट जारी रहेगी, फिर भी 2020 की तुलना में 2050 में विश्व की जनसंख्या 20-30 फीसदी अधिक होने की संभावना है। जहां एक ओर बढ़ती विश्व जनसंख्या मानव अस्तित्व के लिए एक खतरा बनती जा रही है। वर्ष, 2024 में विश्व की जनसंख्या 810 करोड़ रही। विश्व में बढ़ती जनसंख्या के कारण दुनिया के प्राकृतिक संसाधन प्रतिदिन एक असहनीय दर से कम होते जा रहे हैं। यह जलवायु परिवर्तन के लिए भी एक चुनौती है।

