चीन की ओर से दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर प्रतिबंध लगने के बाद भारत की चिंता लगातार बढ़ गई है। पिछले दिनों ही चार सदस्यों वाले क्वाड समूह के विदेश मंत्रियों ने खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव की शुरुआत की है। यह कदम आर्थिक सुरक्षा को मजबूती देने की महत्वपूर्ण पहल है। वाशिंगटन डीसी में हुई बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री ताकेशी इवाया शामिल हुए थे। सभी ने एक सुर में खनिज आपूर्ति को सुचारू बनाने के लिए कदम उठाने पर चर्चा की है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अन्य सभी देशों के विदेश मंत्रियों से प्रतिबंध हटाने के लिए चीन पर दबाव बनाने के लिए कहा है। वैसे तो भारत दुर्लभ खनिजों के मामले में अच्छी स्थिति में है। यहां दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा भंडार होने के बावजूद भारत अभी भी एक प्रमुख आयातक है। जहां भारत अपनी घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने की दिशा में काम कर रहा है। भारत में दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का काफी भंडार है। इनमें कोबाल्ट, तांबा, ग्रेफाइट और निकल शामिल है। वहीं चीन दुनिया के आरईई का एक बड़ा आपूर्तिकर्ता है और भारत अपनी आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के लिए चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। वहीं भारत सरकार देश में ही दुर्लभ खनिजों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं भी बना रही है। पर अब तक इसे सफलता नहीं मिल पाई है। दुर्लभ खनिजों का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों और रक्षा, कृषि, ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों में किया जाता है, जिससे वे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

