भारत में वैसे तो इस बार मानसून के दौरान सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना जताई जा रही है। इस बार एल नीनो की स्थिति बनने की भी आशंका नहीं है। सितंबर तक इस बार जमकर बारिश का आसार जताए जा रहे है। इससे किसानों को बड़ी राहत मिलने के आसार हैं। देश की लगभग आधी कृषि भूमि इस पर निर्भर है। समय पर और अच्छे मानसून से खाद्य आपूर्ति पर दबाव कम हो सकता है, मुद्रास्फीति कम हो सकती है। पर इनदिनों मौसम में प्रतिदिन आ रहे बदलाव से आम लोगों के लिए सब्जियां के बढ़ते भावों ने जायका ही बदल दिया है। सब्जियों की कीमतों में इनदिनों करीब तीन से चार गुना बढ़ोतरी देखी जा रही है। बढ़ती कीमतों के कारण लोगों को दाल से रोटी खाकर ही अपना काम चलाना पड़ रहा है। कुछ सब्जियां जो पहले 30 रुपए प्रति किलो मिल रही थीं, अब वही 40-45 रुपए तक पहुंच गई है। इनमें टमाटर, गोभी, धनिया, अदरक, करेला, भिंडी, खीरा, नींबू, अरबी, मिर्च और पालक में तेजी देखने को मिल रही है। राजस्थान के आस-पास के खेतों से सीधे मंडी तक आने वाली सब्जियां फिलहाल बहुत महंगी मिल रही है, क्योंकि अधिकांश सब्जियां बदलते मौसम में खराब हो गई है। जो थोड़ी बहुत हुई वह महंगे दामों में मिल रही है। इसके अलावा इसकी अन्य वजह यह भी मानी जा रही है कि सब्जियां देश के अलग-अलग राज्यों से आ रही हैं। राजस्थान में टमाटर बेंगलूरु, धनिया नासिक, अदरक कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और मध्यप्रदेश से गोभी, उत्तर प्रदेश से करेले की खेप आ रही है। बढ़ते परिवहन लागत के कारण भी राजस्थान में आते-आते सब्जियों के कीमतों में वृद्धि होना लाजमी है।

