भारत को अब पाकिस्तान को आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए निरंतर अपनी रणनीति में बदलाव करते रहने होगा। वहीं पाक को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान खुले रूप से समर्थन दे चुके तुर्की, अजरबैजान, बांग्लादेश और चीन के उत्पादों के बहिष्कार की रणनीति को लगातार आगे बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। जबकि पाकिस्तान बार-बार भारत से सिंधु जल संधि को स्थगित करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह कर रहा है, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों राष्ट्र के नाम दिए संदेश में साफ कर दिया है कि पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि भारत अब इस पर कोई समझौता नहीं करेगा। इसके अलावा पाकिस्तान के साथ सभी प्रकार के कारोबार पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यहीं नहीं पाकिस्तान का झंडा लगे जहाजों को किसी भी भारतीय बंदरगाह पर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। भारत सरकार ने पाकिस्तान से आने वाली सभी प्रकार की डाक और पार्सल सेवाओं के आदान-प्रदान को भी तुरंत प्रभाव से बंद करने का भी फैसला लिया है। भारत के यह सभी फैसले हवाई और जमीनी दोनों मार्गों पर लागू किए गए हैं। भारत ने अटारी लैंड-ट्रांजिट पोस्ट को भी बंद कर दिया है। पाक को भारत के निर्यात रुकने से पाकिस्तान की घरेलू अर्थव्यवस्था मुश्किल में होगी और महंगाई बढ़ जाएगी। इससे वहां के लोगों को खाने-पीने की चीजों के लिए तरसना पड़ेगा। ऐसे में भारत की ओर से लगातार लगाए जा रहे आर्थिक प्रतिबंधों से पाकिस्तान को पूरी तरह से पस्त करने की रणनीति कारगार सिद्ध हो रही है। सरकारी प्रयासों के साथ देश के उपभोक्ताओं को भी स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग का संकल्प लेकर आगे बढऩा होगा। ऐसे में पाकिस्तान को हथियार देने और समर्थन देने वाले देशों पर भी बंदिशें लगाने के लिए उनका बहिष्कार करना भी सर्वोत्तम कदम कहा जा सकता है। किसी भी देश की अर्थव्यवस्था उसकी रीढ़ होती है, अगर यह चरमरा या टूट जाए तो वह देश कभी आगे नहीं बढ़ सकता है। ऐसा ही कदम अब भारत को इन देशों के लिए उठाना पड़ेगा।

