Friday, July 10, 2026 |
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सूखे मेवे आम आदमी की पहुंच से होते दूर

मिडिल ईस्ट तनाव से इंपोर्ट व्यापार पूरी तरह ठप, दुगुने भाव में मिल रहे है सूखे मेवे

by Business Remedies
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जयपुर | बीआर न्यूज नेटवर्क | ईरान-इजरायल-यूएस युद्ध, होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी जैसी स्थिति से भारत के सूखे मेवों पर काफी असर पड़ा है। अधिकांश सूखे मेवे करीब दुगुने भाव में मिल रहे है। यह संकट मुख्य रूप से मार्च माह से ज्यादा गहराया है, जब शिपिंग रूट्स बाधित हुए। वहीं ईरान से भारत आने वाले हर तरह के मेवे में बहुत भारी कमी आई है। इससे इंपोर्ट व्यापार पूरी तरह से ठप हो गया है। भारतीय उपभोक्ताओं को सूखे मेवे महंगे मिल रहे हैं और अगर संकट लंबा खिंचा तो और असर पड़ेगा।

सूखे मेवों पर क्यों आई दिक्कतें?
भारत सूखे मेवों का बड़ा आयातक है। ईरान से पिस्ता, मामरा बादाम, किशमिश, अंजीर, खजूर और केसर आते हैं। अफगानिस्तान से भी कई आइटम्स ईरान या पाकिस्तान रूट से गुजरते हैं। युद्ध और होर्मुज बंदी के कारण सप्लाई चेन रुक गई है। दुबई जैसे हब से ट्रांसशिपमेंट भी प्रभावित होने से काफी दिक्कतें आई है।

कीमतों में तेज उछाल
पिस्ता- 2,000 रुपए किलोग्राम से 4,000 रुपए किलोग्राम तक बढ़े हैं। ईरानी मामरा बादाम- 2,000 रुपए-2,200 रुपए किलोग्राम से 3,800 रुपए-4,200 रुपए किग्रा तक बढ़े हैं। अन्य आइटम्स अंजीर, किशमिश- 40-100 रुपए किग्रा या 30-100 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। कुल मिलाकर कई सूखे मेवों में 20-50 फीसदी या उससे ज्यादा महंगे यानि कुछ जगहों पर 80-100 फीसदी तक वृद्धि हुई है।

स्टॉक की कमी और अनिश्चितता
रमजान व ईद जैसी डिमांड के समय आयात रुकने से बाजार में दबाव बढ़ा है। व्यापारी नए ऑर्डर देने से कतरा रहे हैं। अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव ने अतिरिक्त समस्या पैदा की है। इसके अलावा शिपिंग रूट्स लंबे हो गए है, जिससे लागत बढ़ी है। एयर कार्गो भी प्रभावित हुआ है।

वैकल्पिक सप्लाई पर कम असर
अमेरिकी (कैलिफोर्निया) बादाम या चिली वाले अखरोट जैसी वैकल्पिक सप्लाई पर कम असर पड़ा है, लेकिन कुल बाजार महंगा हुआ। घरेलू स्टॉक फिलहाल कुछ समय चला सकते हैं, लेकिन लंबे संकट में और दिक्कत आएगी।

आखिर कब तक सुधर पाएगी स्थिति?
मार्च के अंत तक कुछ शिपमेंट्स फिर से शुरू तो हुई है, लेकिन लॉजिस्टिक्स डिसरप्शन बनी हुई है। होर्मुज आंशिक रूप से खुलने या सीजफायर के बाद भी सप्लाई पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। युद्ध रुकने के बाद भी सप्लाई सामान्य होने में 2-3 महीने लग सकते हैं। नई फसलें आने, रूट्स स्थिर होने और स्टॉक बिल्ड-अप में समय लग सकता है। वर्तमान में स्थिति अभी भी अनिश्चित है। अगर तनाव कम हुआ और होर्मुज पूरी तरह खुला, तो मई-जून तक कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन पूरी रिकवरी गर्मियों के अंत या बाद में ही संभव हो सकेगी।



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