आजकल हम डिजिटल तो होते जा रहे हैं, लेकिन कई बार डिजिटल गतिविधियां धरी की धरी रहे जाती हैं। एक बार सर्वर डाउन हो जाने के बाद सब कुछ ठप्प हो जाता है। पिछले दिनों जो कुछ हुआ यह सब को विदित है। क्राउडस्ट्राइक के एक अपडेट के कारण माइक्रोसॉफ्ट सर्विस आउटेज ने दुनिया भर में कंप्यूटर स्क्रीन ब्लू कर दीं। इस घटना ने देश की बैंकों और अस्पतालों सहित कई क्षेत्रों को प्रभावित किया। कंप्यूटर की अचानक ब्लू होती स्क्रीन ने खतरे का आईना भर दिखाया, जिसके बारे में हम अनजान बने हुए थे। माइक्रोसॉफ्ट की सर्विस क्या ठप हुई, ऐसा लगने लगा कि किसी ने दुनिया से उसकी रफ्तार ही छीन ली हो। इस घटना से बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ। जरूरत है इससे सबक सीखने की ताकि फिर ऐसे हालात न बनें। समस्या की वजह था साइबर सिक्योरिटी फर्म क्राउडस्ट्राइक का एक अपडेट।
इस फर्म की सर्विस माइक्रोसॉफ्ट समेत तमाम बड़ी कंपनियां और ऑर्गनाइजेशन लेते हैं। क्राउडस्ट्राइक ने साइबर अटैक से निपटने के लिए एक सॉफ्टवेयर डिजाइन किया था, लेकिन इसमें कुछ गड़बड़ी हो गई। जब यह सॉफ्टवेयर अपडेट हुआ, तो सिस्टम क्रैश होने लगे, कंप्यूटर की स्क्रीन ब्लू दिखने लगी। इस गड़बड़ी का असर बैंकिंग और आईटी सेक्टर से लेकर एविएशन तक पर पड़ा। तमाम उड़ानें रद्द हो गईं और कई कंपनियों में काम ठप हो गया। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या क्राउडस्ट्राइक ने अपने नए अपडेट का सही से टेस्ट किया था? एक रिपोर्ट बताती है कि सॉफ्टवेयर अपडेट रात के समय लोगों के पास अपने आप चला गया था। ऐसे में सुबह जब काम शुरू हुआ, तो सिस्टम बैठने लगे। कंपनी ने अपनी गलती मान ली है, लेकिन क्या इतने से यह गारंटी मिल जाती है कि भविष्य में ऐसी घटना नहीं होगी? बात केवल एक क्राउडस्ट्राइक की नहीं है। हमें ऐसी पॉलिसी चाहिए, जो जवाबदेही तय करती हो। अभी तक ऐसी सिचुएशन हमने हॉलिवुड फिल्मों में ही देखी थी, जहां कोई विलेन एक सिस्टम के जरिये पूरे देश की व्यवस्था को हिला देता है।
माइक्रोसॉफ्ट आउटेज ने उस स्क्रिप्ट को हकीकत में ला दिया। साथ ही, इससे जाहिर हुआ कि हमारी तैयारी कितनी अधूरी है। नेटवर्क का जाल जैसे-जैसे घना होता जाएगा, वैसे-वैसे इस तरह के खतरे भी बढ़ेंगे। हालांकि इसका यह कतई मतलब नहीं है कि टेक्नोलॉजी से दूरी बना ली जाए। तकनीक तरक्की के लिए है, लेकिन इससे जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी और तैयारी होनी चाहिए। नेटवर्क के अपने फायदे हैं, लेकिन साथ में जोखिम भी, जिससे हम अभी-अभी गुजरे हैं।

