वर्तमान में प्राचीन धरोहर पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, इसकी ओर लोगों को जागरूक कर सांस्कृतिक विरासत, स्मारकों और ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा करना हम सबका कर्तव्य है। इसी उद्देश्य को लेकर आज विश्व धरोहर दिवस मनाया जाएगा। यह दिन हमें याद दिलाता है कि धरोहर केवल अतीत की बात नहीं, बल्कि हमारी पहचान, संस्कृति और भविष्य का अभिन्न हिस्सा है। यह युद्ध, जलवायु परिवर्तन या आपदाओं से खतरे में पड़ी विरासतों के प्रति चिंता जताता है। इस वर्ष की थीम संघर्ष और आपदाओं के संदर्भ में जीवित विरासत के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया है, जो युद्ध या प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा पर केंद्रित है। वर्ष,1983 में यूनेस्को की 22वीं सामान्य सभा ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी और सदस्य देशों को 18 अप्रैल को यह दिवस मनाने की सिफारिश की। तब से लेकर हर साल आज के दिन विश्व स्तर पर यह दिवस मनाया जाता है। यह दिन सांस्कृतिक विरासत की विविधता, उसकी कमजोरियों और संरक्षण की आवश्यकता पर जागरूकता फैलाने के लिए समर्पित है। यह दिवस यूनेस्को के विश्व धरोहर संरक्षण सम्मेलन से भी जुड़ा हुआ है, जो सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों की रक्षा के लिए वैश्विक ढांचा प्रदान करता है। यह दिवस समुदायों को अपनी स्थानीय विरासत से जोड़ता है और भावी पीढिय़ों के लिए इसे सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी सिखाता है। स्मारकों, पुरातत्व स्थलों, जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं और प्राकृतिक स्थलों दोनों की रक्षा पर जोर देता है। लोगों को बताना है कि सांस्कृतिक धरोहर हमारी पहचान, इतिहास और भविष्य का आधार है। विरासत स्थलों की सुरक्षा के लिए सरकारों, संगठनों और आम लोगों को प्रेरित करना भी है। इसके अलावा देशों के बीच साझा विरासत की रक्षा के लिए सहयोग को मजबूत करना है। स्कूलों, विश्वविद्यालयों और समुदायों में सेमिनार, कार्यशालाएं, स्थलों के भ्रमण, प्रदर्शनियां और चर्चाएं आयोजित करना भी उद्देश्य है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि हमारी विरासत केवल अतीत की नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की भी है। इसे नष्ट होने से बचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

