चेन्नई,
तमिलनाडु में छोटे व्यापारियों और निर्माताओं पर जैविक थैलों की बढ़ती कीमतों का असर साफ दिखाई देने लगा है। व्यापारियों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे माल की लागत में वृद्धि इस तेजी के मुख्य कारण हैं। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव उन उद्योगों पर पड़ा है जो पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल पर निर्भर हैं, जिनमें जैविक पैकेजिंग उद्योग भी शामिल है। हालांकि जैविक थैले मुख्य रूप से पौधों से प्राप्त सामग्री जैसे मक्के के स्टार्च, पीएलए और पीबीएटी से बनाए जाते हैं, फिर भी इनके निर्माण में कच्चे तेल से जुड़े तत्वों का उपयोग होता है। इस कारण ये वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील रहते हैं।
उद्योग से जुड़े एक निर्माता ने बताया कि जैविक थैलों में उपयोग होने वाले कच्चे माल का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा कच्चे तेल से संबंधित होता है। हाल के सप्ताहों में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे उत्पादन लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है। उद्योग के अनुमान के अनुसार, एक किलोग्राम जैविक थैले बनाने की लागत लगभग 127 रुपये से बढ़कर 170 रुपये हो गई है। इसके साथ ही बाजार में इनकी कीमत भी लगभग 150 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर करीब 250 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है, जिससे आपूर्तिकर्ताओं और ग्राहकों दोनों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।
कीमतों में इस वृद्धि का असर खुदरा बाजार में भी दिखने लगा है। छोटे दुकानदार, जिन्होंने एकल उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध के बाद धीरे-धीरे जैविक विकल्प अपनाए थे, अब खर्च नियंत्रित करने के लिए इनका उपयोग कम कर रहे हैं। चेन्नई के एक दुकानदार ने बताया कि अब वे केवल 100 रुपये या उससे अधिक की खरीदारी पर ही जैविक थैले दे रहे हैं, जबकि छोटी खरीद पर कागज के लिफाफों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में जैविक थैले प्लास्टिक के एक टिकाऊ विकल्प के रूप में उभरे थे, लेकिन मौजूदा लागत वृद्धि इनके व्यापक उपयोग के लिए चुनौती बन रही है, खासकर छोटे व्यापारियों के बीच। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे माल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं या सरकार की ओर से कोई सहायता नहीं मिलती, तो पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग की दिशा में हो रहा बदलाव प्रभावित हो सकता है और व्यापारी फिर से सस्ते विकल्पों की ओर लौट सकते हैं।

