Monday, July 13, 2026 |
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अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद से ब्रेंट कच्चा तेल 80 डॉलर से नीचे, भारतीय मुद्रा को मिला सहारा

by Business Remedies
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Brent Crude Prices Fall Below 80 Dollars Amid US-Iran Truce Hopes And Stronger Indian Rupee

अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी युद्धविराम की बढ़ती उम्मीदों के बीच वैश्विक कच्चे तेल बाजार में गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों और कारोबारियों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच समझौता सफल रहता है, तो पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव कम हो सकता है। इसी उम्मीद के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर दबाव देखने को मिला।

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चा तेल बुधवार को 0.72 प्रतिशत गिरकर 78.39 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चा तेल लगभग 1 प्रतिशत फिसलकर 75.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। तेल बाजार में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब निवेशक क्षेत्रीय स्थिरता की संभावनाओं का आकलन कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौते का खाका सामने आया है, जिसका उद्देश्य पश्चिम एशिया संघर्ष को समाप्त करना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि तेहरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। वहीं, अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद ईरान को तेल बेचने की अनुमति दी जा सकती है।

इस सप्ताह हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन अप्रैल में घोषित युद्धविराम को अगले 60 दिनों के लिए बढ़ाता है। इससे संघर्षरत पक्षों को स्थायी शांति समझौते के लिए बातचीत का अतिरिक्त समय मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वार्ता सफल रहती है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। समझौते के तहत अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर लगाए गए प्रतिबंध हटाएगा। इसके बदले तेहरान, होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों और अन्य समुद्री यातायात को गुजरने की अनुमति देगा। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और लंबे समय से तनाव का केंद्र बना हुआ था।

उधर, भारतीय मुद्रा में भी मजबूती देखने को मिली। बुधवार को रुपया 31 पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.29 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 94.56 पर था। मजबूत होती घरेलू मुद्रा को विदेशी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली में भी कमी आ रही है। रुपये की लगातार मजबूती इस प्रवृत्ति को आगे बढ़ा सकती है। उनका मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और भारत में विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ता है, तो रुपया और मजबूत हो सकता है।

विशेषज्ञों ने कहा कि ब्रेंट कच्चे तेल में तेज गिरावट और भारत में विदेशी मुद्रा जमा मार्ग के जरिए संभावित पूंजी प्रवाह रुपये को अतिरिक्त समर्थन दे सकता है। इससे विदेशी निवेशकों की बिकवाली घट सकती है और वे भविष्य में खरीदारी की ओर भी रुख कर सकते हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि रुपये की मजबूती जारी रहती है और पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है, तो भारतीय वित्तीय बाजारों को स्थिरता मिल सकती है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और घरेलू बाजारों में मजबूती का माहौल बन सकता है।



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