Tuesday, July 7, 2026 |
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Breathefree यात्रा देशभर में स्क्रीनिंग और मरीजों की सहायता तक पहुंच मुहैया कराती है

by Business Remedies
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बिजऩेस रेेमेडीज/जयपुर श्वसन स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने और प्रभावी उपचार समाधानों के प्रचार-प्रसार की अपनी निरंतर प्रतिबद्धता में, Cipla लिमिटेड की मरीज समर्थन पहल, Breathefree, देशभर में अपनी प्रभावशाली यात्रा को ब्रीदफ्री यात्रा के साथ जारी रखे हुए है। यह यात्रा लोगों को उनके श्वसन स्वास्थ्य का आकलन करने और समझने में मदद करने के लिए व्यापक जागरूकता और सीधे मरीज की सहायता को समर्पित है। Asthma और COPD (क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) जैसे पुराने श्वसन रोगों के लिए स्क्रीनिंग चैनलों तक पहुंच बेहतर करने के लक्ष्य के साथ, ब्रीदफ्री यात्रा ने 335 से अधिक शहरों (नगरों) में यात्रा की है, 6,600 से ज्यादा शिविर आयोजित किए हैं और देश भर में करीब 10 लाख मरीजों की सहायता की है।
बढ़ती चुनौतियों के बीच श्वसन स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, डॉ. डी. सी. गुप्ता, कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट, जयपुर, ने कहा कि लाखों लोग रोजाना वाहन उत्सर्जन, औद्यगिक प्रदूषण, निर्माण के कारण उडऩे वाली धूल और कृषि कचरे को जलाने से उत्पन्न होने वाले हानिकारक कणों (पीएम 2.5 और पीएम10) के खतरनाक स्तर के संपर्क में आते हैं। इसके अलावा, जिन शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 500 से ऊपर है, वहां की हवा में सांस लेना दिन में 25-30 सिगरेट पीने के बराबर है। ये कारक श्वसन रोगों के बढ़ते बोझ में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, साथ ही अस्थमा और सीओपीडी की बार-बार होने वाली गंभीरता को भी ट्रिगर करते हैं। मरीजों और देखभाल करने वालों को सशक्त बनाने तथा जनता को सटीक जानकारी प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए, ब्रीदफ्री यात्रा जैसी पहल भारत में श्वसन रोगों के बढ़ते बोझ को शिक्षा, शीघ्र निदान और मरीज समर्थन के माध्यम से संबोधित करते हैं।
जागरूकता और कार्रवाई के बीच अंतर को खत्म करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए, डॉक्टर ने कहा कि अस्थमा और सीओपीडी का प्रभावी प्रबंधन बीमारी का जल्दी पता चलने और डॉक्टर के बताये उपचारों का सख्ती से अनुपालन करने से होता है। हालांकि, इनहेलेशन थेरेपी से संबंधित बदनामी या चर्चा तथा गलतफहमियों के कारण और रोजाना के लक्षणों की बजाय गंभीरता पर ध्यान केंद्रित करने से अक्सर इन स्थितियों का नियंत्रण खराब रहता है। जागरूकता के साथ मजबूत सपोर्ट सिस्टम (सहायता व्यवस्था) समर्थन प्रणालियों को जोडऩे वाला एक बहुआयामी दृष्टिकोण आवश्यक है, जो मरीजों की स्क्रीनिंग से लेकर लंबे समय तक उपचार पालन तक मार्गदर्शन करे। Breathefree यात्रा जैसी पहल मरीजों को बाधाओं को पार करने, अपने फेफड़ों के स्वास्थ्य पर नियंत्रण पाने और उनकी जीवन गुणवत्ता को काफी हद तक बेहतर करने के लिए सशक्त बनाते हैं।
भारत में बढ़ते गैर-संचारी रोगों के कारण स्वास्थ्य संकट बढ़ रहा है, जिसमें अस्थमा और COPD का योगदान प्रमुख है। हवा की गुणवत्ता खराब होने, औद्योगिक उत्सर्जन, धूम्रपान और अस्वास्थ्यकर जीवनशैली जैसे कारणों ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। चिकित्सा विज्ञान में प्रगति के बावजूद, भारत में अस्थमा और COPD के कई मामले बिना निदान के रह जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप रोग का प्रबंधन अपर्याप्त होता है और जटिलताएं टालने योग्य होती हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि गंभीर अस्थमा लक्षण वाले लगभग 70त्न लोगों को चिकित्सीय निदान नहीं मिलता है जबकि सीओपीडी के 95-98 प्रतिशत मामलों का पता ही नहीं चलता हैं। इससे बेहतर जागरूकता, स्क्रीनिंग और समर्थन की तत्काल आवश्यकता उजागर होती है। सिप्ला की Breathefree  पहल ने अस्थमा और COPD मरीजों के लिए स्क्रीनिंग, कौनसेलिंग और उपचार अनुपालन के क्षेत्रों में व्यापक सहायता संसाधन प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 



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