पंतनगर। आज गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के डॉ. रतन सिंह सभागार में ‘आदिग्राम: लाभार्थी संवाद एवं सम्मान समारोह’ का आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आचार्य बालकृष्ण ने की। मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) शिवेंद्र कुमार कश्यप रहे। इस अवसर पर स्वयं सहायता समूह की 300 लाभार्थी महिलाओं के साथ-साथ 42 ग्राम प्रधानों एवं पतंजलि की 20 से अधिक योग शिक्षिकाओं को सम्मानित कर उनकी सराहनीय भूमिका को रेखांकित किया गया।
विदित हो कि जनजातीय कार्य मंत्रालय (भारत सरकार) एवं जनजाति कल्याण निदेशालय (उत्तराखंड) के सहयोग से दिव्य योग मंदिर न्यास द्वारा संचालित ‘Techno-enabled AdiGram’ परियोजना के अंतर्गत उत्तराखंड के 64 जनजाति बहुल ग्रामों का चयन किया गया था, जिनमें ऊधम सिंह नगर के 42 ग्राम भी सम्मिलित थे। परियोजना का उद्देश्य digital technology, data और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से समावेशी विकास सुनिश्चित करना था।
परियोजना के अंतर्गत 17,000 से अधिक परिवारों और लगभग 65,000 जनजातीय नागरिकों का digital एवं geo-tagged database तैयार किया गया। सभी परिवारों और प्रमुख ग्राम परिसंपत्तियों की 100 प्रतिशत geo-tagging पूर्ण हुई। 5,000 से अधिक किसानों को digital कृषि platform से जोड़ा गया तथा 15,000 से अधिक व्यक्तियों को आजीविका व skill development training दिया गया। 200 से अधिक जनजातीय शिल्पकारों को इरुला e-commerce platform से जोड़ा गया और 50 प्रतिशत से अधिक परिवारों को पात्र सरकारी योजनाओं से जोड़ा गया। digital literacy में 30-40 प्रतिशत सुधार तथा लाभार्थियों की आय में 20-30 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। सभी 64 गांवों के लिए evidence-based विकास योजनाएं भी तैयार की गईं।
परियोजना के तहत स्वयं सहायता समूहों को digital marketing के साथ अन्नदाता, इरुला और सेवा सर्विस app का training दिया गया। अन्नदाता app किसानों को सीधे बाजार से जोड़ता है, इरुला app स्थानीय शिल्पकारों के लिए marketplace उपलब्ध कराता है तथा सेवा सर्विस app सेवा प्रबंधन को सरल बनाता है। Techno-enabled AdiGram परियोजना ने data, digital technology और सामुदायिक भागीदारी पर आधारित एक व्यावहारिक model प्रस्तुत किया है, जो अन्य जनजातीय क्षेत्रों के लिए भी अनुकरणीय हो सकता है।
समारोह को संबोधित करते हुए आचार्य बालकृष्ण ने संस्थान की कृषि संबंधी पहलों की समीक्षा की और नई संभावनाओं पर प्रकाश डाला। पतंजलि अनुसंधान संस्थान, हरिद्वार द्वारा विकसित ‘धरती का डॉक्टर’ मृदा परीक्षण यंत्र तथा संस्थान की पुस्तकों का प्रदर्शन किसानों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहा।
समारोह में पतंजलि के वैज्ञानिक एवं साध्वी बहनें भी उपस्थित रहीं।

