अडाणी समूह की अंबुजा सीमेंट्स ने यूनाइटेड किंगडम स्थित स्वच्छ प्रौद्योगिकी कंपनी लीलैक लिमिटेड के साथ साझेदारी की घोषणा की है। इस साझेदारी के तहत गुजरात के कच्छ जिले के सांघीपुरम स्थित संयंत्र में व्यावसायिक स्तर पर कम-कार्बन सीमेंट उत्पादन के लिए दुनिया की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक विकसित की जाएगी। कंपनी के अनुसार, परियोजना के सफल होने पर इसकी क्षमता को 7 से 8 गुना तक बढ़ाया जा सकता है। इससे प्रतिवर्ष 10लाखटन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड को पकड़ने की क्षमता विकसित होगी। यह भारत सहित वैश्विक स्तर पर कम-कार्बन सीमेंट उत्पादन के लिए एक प्रभावी और विस्तार योग्य मॉडल तैयार करने में मदद करेगा।
अंबुजा सीमेंट्स के निदेशक करण अडाणी ने कहा कि सीमेंट उद्योग को कम-कार्बन भविष्य की ओर ले जाने के लिए साहसिक सोच, तकनीकी नवाचार और पूरे मूल्य शृंखला में सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लीलैक के साथ यह साझेदारी अगली पीढ़ी की उन तकनीकों का मूल्यांकन करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो उत्पादन प्रक्रिया से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के साथ ऊर्जा दक्षता बढ़ाने में भी मदद कर सकती हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह पहल भविष्य के लिए विश्वस्तरीय विनिर्माण संचालन विकसित करने की कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति के अनुरूप है। यह साझेदारी अंबुजा सीमेंट्स की व्यापक डी-कार्बोनाइजेशन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और वर्ष 2050 तक नेट जीरो लक्ष्य हासिल करने की दिशा में कंपनी के प्रयासों को मजबूती प्रदान करेगी।
सांघीपुरम स्थित अंबुजा सीमेंट्स के 6.6एमटीपीए क्षमता वाले सांघी संयंत्र में स्थापित की जाने वाली यह व्यावसायिक प्रदर्शन परियोजना लीलैक की कार्बन कैप्चर और हाइब्रिड विद्युत ताप तकनीक के एकीकरण का परीक्षण करेगी। इसका उद्देश्य नवीकरणीय विद्युत के अधिक उपयोग तथा उत्पादन प्रक्रिया में अनिवार्य रूप से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड को पकड़कर सीमेंट निर्माण से होने वाले उत्सर्जन को कम करना है। कंपनी ने बताया कि यह तकनीक ऐसी उत्पादन व्यवस्था विकसित करने में सक्षम है, जिसमें कोयले की खपत को शून्य तक लाया जा सकता है। साथ ही वैकल्पिक ईंधनों का लचीले ढंग से उपयोग भी संभव होगा।
लीलैक लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेनियल रेनी ने कहा कि अंबुजा सीमेंट्स दुनिया के सबसे बड़े और उन्नत सीमेंट विनिर्माण नेटवर्क में से एक का संचालन करती है। उन्होंने कहा कि यह सहयोग कम लागत और कम-कार्बन सीमेंट उत्पादन के लिए व्यावसायिक स्तर की परियोजना विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि दोनों कंपनियां मिलकर वैश्विक सीमेंट उद्योग के लिए आर्थिक रूप से व्यवहारिक, दोहराने योग्य और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप समाधान प्रस्तुत करने का लक्ष्य रखती हैं। कंपनी का मानना है कि यह सहयोग कार्बन कैप्चर तकनीक की आर्थिक व्यवहार्यता को बेहतर बनाएगा, जिससे बड़े पैमाने पर कार्बन कैप्चर और उपयोग से जुड़ी परियोजनाओं के विस्तार को बढ़ावा मिलेगा।
अंबुजा सीमेंट्स वर्तमान में सीमेंट विनिर्माण प्रक्रियाओं में विद्युतीकरण को बढ़ावा दे रही है और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को तेजी से बढ़ा रही है। लगभग 1गीगावाट की स्वामित्व वाली हरित ऊर्जा क्षमता के समर्थन से कंपनी कार्बन कैप्चर जैसी उन्नत तकनीकों के व्यापक उपयोग की आधारशिला तैयार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो भारत के सीमेंट क्षेत्र में उत्सर्जन कम करने की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। साथ ही देश के हरित औद्योगिक विकास और जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

