चारु भाटिया | बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। आधुनिक चिकित्सा तकनीक, विशेष उपचार केंद्रों की स्थापना और निजी स्वास्थ्य संस्थानों की बढ़ती भागीदारी ने चिकित्सा सेवाओं को नई दिशा दी है। इसी परिवर्तनशील परिदृश्य में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले विशेषज्ञों में एमएल स्पाइन एंड ऑर्थोपेडिक मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के संस्थापक डॉ. मोहित मीणा भी शामिल हैं। इस विशेष बातचीत में उन्होंने अपनी चिकित्सा यात्रा, स्पाइन सर्जरी में हो रही प्रगति और स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य पर अपने विचार साझा किए।
आपको चिकित्सा क्षेत्र में आने की प्रेरणा कहाँ से मिली?
मेरा जन्म बीकानेर जिले में हुआ और मेरा पालन-पोषण ऐसे परिवार में हुआ जो चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ा रहा है। मेरे पिता डॉ. एम.एल. मीणा लगभग तीन दशकों तक सरकारी अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत रहे, मुख्यत: राजगढ़ में। उनकी समाज सेवा और मरीजों के प्रति समर्पण को देखते हुए मुझे भी चिकित्सा क्षेत्र में आने की प्रेरणा मिली। मैंने महसूस किया कि यह ऐसा पेशा है जिसके माध्यम से हम सीधे लोगों की मदद कर सकते हैं और समाज के लिए योगदान दे सकते हैं।
अपनी मेडिकल शिक्षा और शुरुआती करियर के बारे में बताइए।
राजगढ़ में सीनियर सेकेंडरी शिक्षा पूरी करने के बाद मैं प्री-मेडिकल परीक्षा की तैयारी के लिए कोटा गया। बाद में मुझे एसएमएस मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिला, जहाँ से मैंने वर्ष 2007 में एमबीबीएस पूरा किया। ग्रेजुएशन के बाद मैंने कुछ समय के लिए सिविल सेवा की दिशा में भी प्रयास किया। मैं दिल्ली गया और वहाँ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करते हुए मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्य किया। इसी दौरान UPSC Combined Medical Services Examination भी पास की। लेकिन अंतत: मुझे यह एहसास हुआ कि मेरी वास्तविक रुचि प्रशासनिक सेवा के बजाय क्लिनिकल चिकित्सा में है।
आपने ऑर्थोपेडिक्स को ही अपनी विशेषज्ञता के रूप में क्यों चुना?
ऑर्थोपेडिक्स ऐसा क्षेत्र है जिसमें डॉक्टर मरीजों को फिर से चलने-फिरने और सामान्य जीवन जीने में सक्षम बना सकते हैं। जब कोई मरीज इलाज के बाद अपनी गतिशीलता वापस पाता है और सामान्य जीवन में लौटता है, तो यह डॉक्टर के लिए अत्यंत संतोषजनक अनुभव होता है। यही कारण था कि मैंने ऑर्थोपेडिक्स को अपना विशेषज्ञ क्षेत्र चुना।
आपने अपनी पोस्टग्रेजुएट ट्रेनिंग कहाँ से की?
मैंने अपनी पोस्टग्रेजुएट ट्रेनिंग आरएनटी मेडिकल कॉलेज से ऑर्थोपेडिक्स में की। वहाँ मुझे ट्रॉमा केयर, हड्डी एवं जोड़ों की बीमारियों और उन्नत सर्जिकल तकनीकों का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ। मेरी पत्नी पहले एसएमएस मेडिकल कॉलेज में सूक्ष्मजीवविज्ञान में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थीं, उसके बाद उन्होंने आरपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की और सीनियर डेमोंस्ट्रेटर बनीं। इसी दौरान मुझे व्यक्तिगत चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। मेरी माँ को कैंसर का पता चला और बाद में उन्हें हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद कुछ जटिलताएँ भी हुईं। परिवार की देखभाल के लिए मुझे लगभग एक वर्ष तक अपनी पढ़ाई रोकनी पड़ी। इस अनुभव ने मुझे मानसिक रूप से और मजबूत बनाया और यह सिखाया कि पेशेवर और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के बीच संतुलन कितना महत्वपूर्ण है।
आपने स्पाइन सर्जरी में विशेषज्ञता कैसे प्राप्त की?
पोस्टग्रेजुएशन पूरा करने के बाद मैंने 2018-19 में महात्मा गांधी हॉस्पिटल में सीनियर रेजिडेंट के रूप में कार्य किया। इसी दौरान मैंने बॉम्बे हॉस्पिटल से स्पाइन सर्जरी में फेलोशिप भी की। इस प्रशिक्षण के दौरान मुझे 500 से अधिक स्पाइन सर्जरी में भाग लेने का अवसर मिला, जिनमें शामिल थीं—
डिजेनरेटिव स्पाइन डिसऑर्डर स्पाइनल ट्रॉमा इंजरी स्पाइनल डिफॉर्मिटी मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी
इस अनुभव ने स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र में मेरी विशेषज्ञता को और मजबूत किया।
एमएल स्पाइन एंड ऑर्थोपेडिक मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल की स्थापना का विचार कैसे आया?
वर्ष 2020 में मैं जयपुर लौटा और मेरा उद्देश्य एक ऐसा विशेष केंद्र स्थापित करना था जहाँ उन्नत ऑर्थोपेडिक और स्पाइन उपचार उपलब्ध हो सके। इसी सोच के साथ एमएल स्पाइन एंड ऑर्थोपेडिक मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल की स्थापना हुई। क्लिनिकल प्रैक्टिस के साथ-साथ मैं महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर और बाद में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में भी कार्य करता रहा। एक अस्पताल की स्थापना केवल चिकित्सा विशेषज्ञता से नहीं होती, बल्कि इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर योजना, नियामकीय अनुपालन और प्रशासनिक प्रबंधन भी आवश्यक होता है। इन सभी चुनौतियों के बावजूद हमारा लक्ष्य हमेशा उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा सेवा और मरीजों की सुरक्षा रहा है।
आज स्पाइन सर्जरी में तकनीक किस प्रकार बदलाव ला रही है?
समय के साथ तकनीक ने स्पाइन सर्जरी को काफी उन्नत बना दिया है। पहले सर्जरी पूरी तरह सर्जन के अनुभव और हाथों की सटीकता पर निर्भर करती थी। आज नेविगेशन-असिस्टेड सर्जरी के माध्यम से इम्प्लांट अधिक सटीकता से लगाए जा सकते हैं। अब रोबोटिक सर्जरी सिस्टम भी जटिल स्पाइन सर्जरी में बेहतर सटीकता प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भी मरीजों के डेटा के विश्लेषण और सर्जरी की योजना बनाने में मदद करने लगा है। हालाँकि, तकनीक का उद्देश्य सर्जन की सहायता करना है, उसे प्रतिस्थापित करना नहीं।
स्पाइन सर्जरी से जुड़े सबसे आम भ्रम क्या हैं?
सबसे बड़ा भ्रम यह है कि स्पाइन सर्जरी से लकवा हो सकता है। वास्तव में आधुनिक तकनीकों और अनुभवी सर्जनों के साथ स्पाइन सर्जरी काफी सुरक्षित होती है। गंभीर जटिलताओं का जोखिम लगभग 0.1 प्रतिशत के आसपास होता है। दूसरा भ्रम यह है कि सर्जरी के बाद लंबे समय तक बिस्तर पर आराम करना पड़ता है। कई मामलों में मरीज सर्जरी के बाद जल्दी खड़े होकर चलना शुरू कर सकते हैं। साथ ही, हर स्पाइन समस्या में सर्जरी जरूरी नहीं होती। अधिकांश मामलों का इलाज दवाइयों, फिजियोथेरेपी और जीवनशैली में बदलाव से किया जा सकता है।
आपके अस्पताल की उपचार नीति क्या है?
हमारे अस्पताल में सटीक निदान और व्यक्तिगत उपचार योजना पर विशेष ध्यान दिया जाता है।हर मरीज का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है, जिसमें उसकी मेडिकल हिस्ट्री, जीवनशैली और क्लिनिकल जांच शामिल होती है। हम ऑर्थोपेडिक सर्जरी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर
मान्य AOसिद्धांतों का पालन करते हैं, जिनमें शामिल हैं—
समय पर और सटीक निदान
वैज्ञानिक फ्रैक्चर प्रबंधन
तेज रिकवरी प्रोटोकॉल
प्रभावी पुनर्वास
हम एक समग्र दृष्टिकोण अपनाते हैं क्योंकि हड्डियाँ, जोड़, मांसपेशियाँ और नसें एक दूसरे से जुड़ी हुई प्रणाली हैं।
आधुनिक जीवनशैली का स्पाइन स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
आज की जीवनशैली का हड्डियों और रीढ़ की सेहत पर बड़ा प्रभाव पड़ रहा है। लंबे समय तक कंप्यूटर और स्मार्टफोन का उपयोग गलत मुद्रा (पोश्चर) और गर्दन में दर्द का कारण बन रहा है, जिसे अक्सर कंप्यूटर सिंड्रोम कहा जाता है। हड्डियाँ जीवित ऊतक होती हैं जिन्हें मजबूत बनाए रखने के लिए नियमित गतिविधि और सही पोषण की आवश्यकता होती है। रीढ़ की सेहत बनाए रखने के लिए चार महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देना चाहिए—
सही मुद्रा (पोश्चर)
नियमित व्यायाम
संतुलित आहार
पर्याप्त धूप
सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की क्या भूमिका है?
सरकारी स्वास्थ्य योजनाएँ चिकित्सा सेवाओं की पहुँच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आयुष्मान भारत जैसी योजनाएँ आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को उपचार के लिए वित्तीय सहायता देती हैं, जबकि राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) सरकारी कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराती है। हालाँकि कभी-कभी अस्पतालों को भुगतान में देरी जैसी प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, फिर भी ये योजनाएँ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाने में बेहद महत्वपूर्ण हैं।
राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं के विकास को आप कैसे देखते हैं?
पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान में स्वास्थ्य सुविधाओं में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। फिर भी हरियाणा, पंजाब, गुजरात और दिल्ली जैसे राज्यों की तुलना में अभी सुधार की काफी संभावनाएँ हैं। भविष्य में अधिक प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की आवश्यकता होगी और साथ ही लोगों में रोकथाम आधारित स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण होगा।
आपके अस्पताल का भविष्य के लिए क्या विजन है?
हमारा अस्पताल जो शुरुआत में 100 बेड का था, अब बढक़र 200 बेड का मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल बन चुका है।
यहाँ कई विभागों की सेवाएँ उपलब्ध हैं—
शिशु रोग
स्त्री रोग
सामान्य चिकित्सा
सामान्य शल्य चिकित्सा
इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी
अस्थि रोग एवं खेल चोट
जठरांत्र रोग
तंत्रिका रोग एवं तंत्रिका विज्ञान
मूत्र रोग एवं गुर्दा रोग
कान, नाक और गला रोग
हृदय विज्ञान
भविष्य में हमारा लक्ष्य जयपुर के बाहरी क्षेत्र में एक समर्पित ट्रॉमा सेंटर स्थापित करना है, जिसमें कार्डियोलॉजी और ऑन्कोलॉजी जैसे विभाग भी हों ताकि आपातकालीन मरीजों को तुरंत उपचार मिल सके।
युवा मेडिकल छात्रों को आप क्या सलाह देना चाहेंगे?
चिकित्सा एक चुनौतीपूर्ण लेकिन अत्यंत संतोषजनक पेशा है। ऑर्थोपेडिक्स और स्पाइन सर्जरी तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र हैं, जहाँ नई तकनीकों और उपचार पद्धतियों का निरंतर विकास हो रहा है। शहरीकरण और बदलती जीवनशैली के कारण स्पाइन से जुड़ी समस्याएँ और ट्रॉमा के मामले भी बढ़ रहे हैं, इसलिए कुशल ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों की मांग भविष्य में और बढ़ेगी। लेकिन इस क्षेत्र में सफलता के लिए समर्पण, निरंतर सीखने की इच्छा और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता आवश्यक है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सही निदान ही प्रभावी उपचार और बेहतर स्वास्थ्य सेवा की नींव है।

