Sunday, July 5, 2026 |
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जहरीली हवा का बढ़ता प्रकोप

by Business Remedies
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punit jain

पिछले कुछ दिनों से दिल्ली-एनसीआर में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) 350 के ऊपर चल रहा है, जो बेहद खराब हवा की श्रेणी को दर्शाता है। इससे दिल्ली-एनसीआर की हवा में पीएम 2.5 यानी प्रदूषित कणों का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा निर्धारित सीमा से 50 गुना अधिक खतरनाक हो गया। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक हर साल तकरीबन 70 लाख लोगों की अकाल मौत की वजह वायु प्रदूषण है और भारत में इसका सबसे अधिक खतरा है। दिल्ली-एनसीआर के साथ देश का एक बड़ा हिस्सा गंभीर किस्म के वायु प्रदूषण से ग्रस्त रहने लगा है। कारण यह है कि जिन कारणों से दिल्ली-एनसीआर प्रदूषण की चपेट में आता है, वही कारण उत्तर भारत के एक बड़े इलाकों में भी दिखने लगे हैं। जो पराली पहले पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तरप्रदेश में जलती थी, वह अब यूपी-बिहार के गांवों में भी जलने लगी है। यदि दिल्ली को प्रदूषण से मुक्त करने में सफलता नहीं मिली तो फिर देश को भी नहीं मिल सकेगी। इसकी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए कि वायु प्रदूषण के शिकार शहरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बोस्टन कालेज की ग्लोबल आब्जर्वेटरी आन पाल्यूशन की रिपोर्ट के मुताबिक केवल 2019 में ही भारत में वायु प्रदूषण से मरने वालों की संख्या 16 लाख रही। देखा जाए तो वाहन और औद्योगिक उत्सर्जन, धूल और मौसम के पैटर्न जैसे कारकों का मिश्रण दिल्ली और देश के दूसरे बड़े शहरों को प्रदूषित करता है। बड़े शहरों में तो इन प्रदूषण स्रोतों का एक बड़ा हिस्सा पूरे वर्ष मौजूद रहता है। दुर्भाग्यवश केवल सर्दियों के दौरान ही हम सभी को अहसास होता है कि हवा प्रदूषित है। फिलहाल जो प्रदूषण है, उसमें पराली का योगदान बहुत कम है। विज्ञान और पर्यावरण केंद्र (सीएसई) द्वारा दिल्ली में वायु प्रदूषण के एक नए प्री-दिवाली और प्री-विंटर विश्लेषण के अनुसार यहां वाहनों को वायु प्रदूषण का मुख्य स्रोत बताया गया है। साल दर साल बढ़ती जा रही वाहनों की संख्या के चलते अकेले परिवहन क्षेत्र से प्रदूषकों का उत्सर्जन लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ गया है।
यह वाकई चिंताजनक है कि दिल्ली शहर नियमित रूप से ‘दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानियों’ की सूची में शीर्ष पर है। दिल्ली की स्थिति को समझने के लिए शहर की सीमाओं से परे ब्लूप्रिंट का विस्तार करना और इसके चारों ओर विकसित होने वाले जटिल पारिस्थितिकी तंत्र को पहचानना महत्वपूर्ण है। दिल्ली-एनसीआर में स्वच्छ वायु के लिए एकीकृत सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के उपयोग और हिस्सेदारी को बढ़ाने, पैदल चलने, साइकिल चलाने और नागरिक के नाते यथासंभव हमें भी निजी वाहन का कम प्रयोग करना चाहिए। बिजली संयंत्रों के लिए बेहतर उत्सर्जन मानक रखने की जरूरत है। पराली जलाने पर भारी जुर्माने के साथ ही पराली को खाद में तब्दील करने की किफायती योजना बनानी होगी।



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