इस बार दिवाली अलग-अलग मान्यता के अनुसार 31 अक्टूबर व एक नवंबर दोनों दिन मनाई जाएगी। धनतेरस से दीपोत्सव की शुरुआत हो गई है। देश में दिवाली और दीपोत्सव को लेकर बनी असमंजस की स्थिति भी खत्म हो गई है। 30 अक्टूबर को यानि आज नरक चतुर्दशी या रूप चौदस (छोटी दिवाली) और फिर 31 अक्टूबर अमावस्या को दिवाली मनाई जाएगी। दिवाली का दान-पुण्य उसके अगले दिन एक नवंबर को किया जाएगा। दो नवंबर को गोवर्धन पूजा और तीन को भैया दूज मनाने के साथ दीपोत्सव संपन्न हो जाएगा। यानी दीपोत्सव इस बार पांच के बदले छह दिन का होगा। यह त्योहार खुशी,रोशनी और अच्छे का बुराई पर विजय का प्रतीक है। दिवाली की तैयारी लोग पहले से ही शुरू कर देते हैं घरों की सफाई से लेकर बाजार में सजावट, कपड़ों, मिठाइयों और कई चीजों की खरीदारी शुरू हो जाती है जो दिवाली तक चालू रहती है। वहीं दिवाली के दिन लोग अपने घरों को रंग-बिरंगी लाइट्स, दिया और मोमबत्तियों की रोशनी से उजागर करते हैं। इस दिन को आस-पड़ोस और परिवार के लोग एक साथ मिलकर मनाते हैं। इस दिन लोग पटाखे फोड़ते हैं, लेकिन पटाखों से निकलने वाले धुएं और केमिकल के कारण पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। जो व्यक्ति की सेहत के लिए भी हानिकारक साबित होता है। इसके कारण कई शहरों में पटाखों पर बैन लगा दिया गया है। अब ऐसे में दिवाली के दिन पूजा कर इको फ्रेंडली तरीके से भी इस दिन को सेलिब्रेट कर सकते हैं।
दिवाली अमावस्या की रात को मनाई जाती है। ऐसे में इस दिन घर में दीये जलाने की परंपरा चली आ रही है, लेकिन आजकल लोग रंग-बिरंगी लाइट्स, मोमबत्तियों या प्लास्टिक के दीयों का उपयोग ज्यादा करते हैं। पारंपरिक मोमबत्तियां और प्लास्टिक के दीपक पर्यावरण के लिए हानिकारक होते हैं। इसके बजाय मिट्टी के दीये का उपयोग करें, इससे पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता है। दिवाली पर पटाखों का चलन सदियों पुराना है,लेकिन इसके कारण अब वायु प्रदूषण काफी बढ़ रहा है, जिससे व्यक्ति की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में इको-फ्रेंडली दिवाली मनाने का एक तरीका यह है कि पटाखों का उपयोग पूरी तरह से बंद कर दें या केवल इको-फ्रेंडली पटाखों का ही चयन करें। दिवाली के दिन घर में रंगोली बनाने की परंपरा भी बहुत पुरानी है। ऐसे में इस दिन पर नेचुरल रंग या फिर फूलों से रंगोली बनाएं। गुलाब,गेंदा, हल्दी और कई तरह का फूलों का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा हल्दी, कुमकुम या कॉफी पाउडर का उपयोग कर भी रंगोली बना सकते हैं।

