उद्योगजगत के पितामह रतन टाटा अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके जाने से एक युग का अंत हो गया। वे भारतवासियों के लिए हमेशा प्ररेणा स्त्रोत बने रहेंगे। इनकी विनम्रता, दयालुता और समाज को बेहतर बनाने के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के कारण उन्होंने कई लोगों का प्रिय बना दिया। उनके निधन से सारा राष्ट्र स्तब्ध है। ८६ वर्ष की आयु में ९ अक्टूबर की रात उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनका जन्म २८ दिसंबर,१९३७ को मुंबई में हुआ था। उनका निधन भारतीय उद्योग और समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। वे एक भारतीय उद्योगपति और परोपकारी व्यक्ति थे, जिन्होंने 1991 से 2012 तक टाटा समूह और टाटा संस के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और फिर अक्टूबर 2016 से फरवरी 2017 तक अंतरिम अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उन्होंने १९९६ में टेलीकॉम कंपनी टाटा टेली सर्विसेज की स्थापना की और देश की सबसे बड़ी आइटी कंपनी टीसीएस को वर्ष, २००४ में शेयर बाजार में लिस्ट कराया। वर्ष, 2008 में उन्हें भारत का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म विभूषण मिला। रतन को इससे पहले 2000 में तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म भूषण मिला था। वे १९७१ में राष्ट्रीय रेडियो और एनएएलसीओ के निदेशक भी रहे और २००८ में नैसकॉम ग्लोबल लीडरशिप पुरस्कार से सम्मानित किए गए। रतन टाटा प्रधानमंत्री की व्यापार एवं उद्योग परिषद के सदस्य भी रहे और मार्च,२००६ में कॉर्नेल विश्वविद्यालय द्वारा २६ वें रॉबर्ट एस सम्मान से नवाजे गए। उनकी दो लाख रुपए की नैनो कार ने ना केवल बाजार में हलचल मचाई, बल्कि उन्हें और भी सराहना दिलाई। वहीं उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान बनाई। उन्होंने ना केवल उद्योग में उत्कृष्टता के लिए प्रयास किए, बल्कि समाज सेवा के प्रति भी गहरा समर्पण दिखाया। इसके अलावा टाटा ट्रस्ट के माध्यम से इन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में कई प्रभावशाली पहल की, जो लाखों के जीवन में सुधार लाने में सहायक साबित हुई। उनकी दूरदर्शिता और नैतिक व्यापार के प्रति प्रतिबद्धता ने उन्हें केवल एक सफल व्यवसायी नहीं, बल्कि एक आदर्श पुरुष भी बना दिया। उनका मानना था कि उद्योग का उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना भी है। उनके द्वारा देश को दिए योगदान और विरासत हमेशा जीवित रहेंगी। ऐसे युग पुरुष को बिजनेस रेमेडीज की टीम की तरफ से शत् शत् नमन।

