Tuesday, July 7, 2026 |
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भारतीय स्टेट बैंक में हिंदी दिवस एवं पखवाड़े का आयोजन

by Business Remedies
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बिजऩेस रेमेडीज/जयपुर
भारतीय स्टेट बैंक, स्थानीय प्रधान कार्यालय, जयपुर में 16 सितंबर को हिंदी दिवस एवं हिंदी पखवाड़े का शुभारंभ किया गया। इस दिन हिंदी को बढ़ावा देने, उसका प्रचार प्रसार करने तथा कर्मचारियों को हिंदी में कार्य करने के लिए प्रेरित करने के लिए हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला की अध्यक्षता महाप्रबंधक दिनेश प्रताप सिंह तोमर ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि हिंदी को सरल एवं आसान बनाया जाए। क्लिष्ट शब्दों का प्रयोग न किया जाए। जब हम बहुत कठिन और क्लिष्ट शब्दों का प्रयोग करते हैं तो भाषा अवरूद्ध हो जाती है। जन मानस में बोले जाने वाले शब्दों का प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि विश्व के 200 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है और यह विश्व में बोली जाने वाली भाषाओं में दूसरे स्थान पर है। इस प्रकार हिंदी विश्व पटल पर भी अपना स्थान बना रही है। उन्होंने हिंदी दिवस पर बैंक के अध्यक्ष के संदेश का वाचन किया। उन्होंने कहा कि हमें अपने उत्पादों एवं सेवाओं को आम ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए उनकी अपनी भाषा में व्यवहार करना होगा और जब हम ऐसा करेंगे तो ग्राहक आत्मीयता का अनुभव करेगा और वह हमसे जुड़ेगा। उन्होनें भारतेन्दु हरिश्चंद्र की पंक्तियॉं उद्धृत करते हुए कहा ‘ निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटन न हिय की सूल’। मातृभाषा की उन्नति के बिना किसी समाज की तरक्की संभव नहीं है और अपनी भाषा के ज्ञान के बिना मन की पीड़ा को दूर करना संभव नहीं है। अपनी भाषा से ही उन्नति संभव है, क्योंकि यही सारी उन्नतियों का मूलाधार है।
मंडल विकास अधिकारी कल्याण गजवेल्लि ने कहा कि जो मधुरता अपनी मातृभाषा में है वह किसी अन्य भाषा में नहीं हो सकता। हमें अपने परिवार में बच्चों के साथ अपनी मातृभाषा में बात;चीत करनी चाहिए और उसके महत्व से उन्हें बताना चाहिए। हिंदी मात्र अनुवाद की भाषा न हो, जहॉं बहुत आवश्यक हो वहीं हिंदी के साथ अंग्रेजी का पाठ भेजा जाए। हमें आम बोलचाल की भाषा का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्टाफ को प्रोत्साहित करने के लिए हिंदी पखवाड़े के दौरान विभिन्न हिंदी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। उप महाप्रबंधक अशोक कुमार सोनी ने भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी में एक शब्द के अनेक विकल्प हैं जब किअंग्रेजी में ऐसा नहीं हैं। यह जैसी बोली जाती है वैसी ही लिखी जाती है।
सहायक महाप्रबंक संदीप कुमार एवं दीपक स्वामी ने हिंदी के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए एवं अनुभव साझा किए। कार्यशाला का संचालन मुख्य प्रबंधक (राजभाषा) प्रदीप कुमार ने किया।

 

 



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