बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली (आईएएनएस)।भारत की ओर से स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रमंडल (सीआईएस) रीजन (रूस, आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान) को किए जाने वाला कपड़ा निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही में 113.33 प्रतिशत बढक़र 64 मिलियन डॉलर हो गया है, जो कि एक वर्ष पहले समान अवधि में 30 मिलियन डॉलर था। यह जानकारी वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़ों में मिली।
मंत्रालय के डेटा के मुताबिक, भारत का कपड़ा निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही में 4.15 प्रतिशत बढक़र 8.78 अरब डॉलर हो गया है, जो कि वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में 8.43 अरब डॉलर था। भारत के कपड़ा और परिधान उद्योग का जीडीपी में योगदान 2.3 प्रतिशत है। वहीं, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में 13 प्रतिशत और निर्यात में 12 प्रतिशत का योगदान है। भारत कपड़ा और परिधान में दुनिया का छठा सबसे बड़ा निर्यातक देश है। सीआईएस देशों के साथ दक्षिण एशियाई देशों में भी भारत के कपड़े की मांग बढ़ी है और यह 35.65 प्रतिशत बढक़र 898 मिलियन डॉलर हो गई है। जानकारों का कहना है कि भारत के कपड़ा निर्यात में बढ़त की वजह अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक माहौल बनना है। साथ ही इसकी एक प्रमुख वजह चीन और बांग्लादेश के ऊपर भारत को खरीदारों द्वारा तरजीह देना भी है। दक्षिण अमेरिकी देशों में भी भारत में बने कपड़े का निर्यात चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 15 प्रतिशत बढक़र 346 मिलियन डॉलर हो गया है।
हालांकि, इस दौरान उत्तर पूर्व एशिया (एनईए) और अफ्रीका में भारतीय कपड़े का निर्यात क्रमश: 28 प्रतिशत घटकर 298 मिलियन डॉलर और 15.74 प्रतिशत घटकर 423 मिलियन डॉलर हो गया है। इसकी वजह बाजार से जुड़ी चुनौतियों को माना जा रहा है।

