बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। वर्तमान में चावल का व्यापार मंदी के दौर में चल रहा है। सरकार अगर व्यापारियों को सपोर्ट करे तो यह व्यापार ऊपर उठ सकता है। यह कहना है चावल उद्योग से जुड़े व्यापारियों का। व्यापारियों ने बताया, एक्सपोर्ट क्वालिटी के चावल पर सरकार ने 950 डॉलर का एनईपी लागू कर रखा है। सरकार उसे कम करे और 20 प्रतिशत ड्यूटी को हटाए। ड्यूटी हटने से व्यापार को फायदा मिलेगा। लागत कम होगी तो व्यापार और तेजी से आगे बढ़ेगा।
गौरतलब है कि राजस्थान में हाडौती संभाग में पर्याप्त पानी है। इस कारण यहां पर धान की खेती बड़े एरिया में होती है। बूंदी जिले में बड़े क्षेत्र में किसान खरीफ सीजन में धान की फसल पैदा करते हैं। क्षेत्र में लगातार धान का रकबा बढ़ता जा रहा है। पिछले 5 साल में 40000 हेक्टेयर रकबा धान का बढ़ा है। बूंदी को धान का कटोरा भी कहते हैं। क्योंकि यहां पर बड़े क्षेत्रफल में धान का उत्पादन होता है। यहां का मौसम धान की फसल के लिए सहायक है। अच्छी व एक्सपोर्ट क्वालिटी का धान पैदा होने से हर साल 1400 करोड़ का चावल निर्यात होता है।
बूंदी के चावल की महक और स्वाद मुख्य खासियत: जानकारी के अनुसार, बूंदी जिले की अर्थव्यवस्था धान पर टिकी है। यहां खुशबूदार चावल देश ही नहीं विदेशों में अपनी महक बिखेरता है। बूंदी की जमीन, पानी में वह खासियत है कि धान की महक स्वाद को बढ़ा देती है। यहां उत्पादन व मुनाफा भी दूसरी जगह से ज्यादा अच्छा होता है। देशभर के दूसरे राज्यों के किसान यहां से बीज लेकर गए हैं, लेकिन वहां के पानी में धान की फसल बूंदी जैसी नहीं पैदा हो पाई।
निर्यात का बड़ा हिस्सा बूंदी से: अगर बारिश सही हो जाए तो इससे मुनाफा देने वाली दूसरी फसल नहीं है। पिछले 5 साल में 40000 हेक्टेयर में धान का रकबा बढ़ा जो दूसरी फसलों से काफी ज्यादा है। कृषि विभाग ने धान का रकबा 1 लाख हेक्टेयर के पार रखा है। भारत से कुल निर्यात होने वाले चावल में से अकेला बूंदी ही हर साल 1400 करोड रुपए का चावल निर्यात कर देता है। 300 करोड़ घरेलू कारोबार होता है।
सवा लाख किसान रोपते हैं धान: बूंदी जिले में करीब सवा लाख किसान धान की फसल करते हैं। जिले का नाम देश-विदेश में है। लोगों को इससे रोजगार भी मिलता है। साधन संपन्न होते किसान, नहरी एरिया तालेड़ा, केशवरायपाटन, बूंदी प्रमुख धान उत्पादक इलाके हैं। यहां 90त्न चावल इन्हीं इलाकों में पैदा किया जाता है।
1700 करोड रुपए का सालाना टर्न ओवर: बूंदी जिले की अर्थव्यवस्था के लिए यहां उत्पादित होने वाला दान काफी अहम है। यहां की चावल मिलों का ही 1700 करोड रुपए का टर्नओवर है। 1400 करोड़ का एक्सपोर्ट होता है। 300 करोड़ लोकल टर्नओवर रहता है। चावल की ऐसी महक होती है कि लोग एक बार खाने के बाद बूंदी का चावल ही मांगते हैं। ताज होटल हो या विदेश की कोई फाइव स्टार होटल बूंदी का चावल महंगी से महंगी थालियां की महक और जायका पैदा करता है।
खाड़ी देशों में बूंदी के चावल की डिमांड: बूंदी के चावल की डिमांड खाड़ी देशों में है। क्वालिटी, खुशबू, चमक के चलते बूंदी के चावल की महक सात समंदर पार तक फैली है। चावल खाड़ी देशों में इराक, ईरान, तुर्की, बहरीन, दुबई, यमन, कुवैत, दक्षिण अफ्रीका में जाता है। हांगकांग, चीन, रूस में भी इसकी डिमांड रहती है।

– नीरज कुमार गोयल, अध्यक्ष, श्री चावल उद्योग संघ, बूंदी
– सरकार नए उद्योगों को तो प्रोत्साहन दे रही है, लेकिन पुराने उद्योगों की समस्याओं को नहीं समझ पा रही है। बूंदी में जो धान पैदा होता है, उससे एक्सपोर्टेबल क्वालिटी का निर्माण होता है। सरकार ने जो 950 डॉलर का एनईपी लागू कर रखी है और 20 प्रतिशत की ड्यूटी लागू कर रखी है। 20 प्रतिशत ड्यूटी लगाने से किसान को धान का पूरा मूल्य नहीं मिल पा रहा है। इससे बूंदी के धान की बिक्री पर प्रतिकूल प्रभाव आ रहा है। सरकार ने जो 20 प्रतिशत ड्यूटी लगा रखी है इसमें रियायत दे और 950 डॉलर की जो एनईपी लगा रखी है, उसे भी घटा कर 850 डॉलर किया जाए। सरकार इन दोनों कार्यों को करती है तो वह यहां के व्यापार व उद्योग के हित में होगा। सीजनल उद्योग है, इसे सीजनल उद्योग की तरह ही ट्रीट किया जाना चाहिए, जिससे व्यापारी व ग्राहक दोनों को समस्या न हो।
– नीरज कुमार गोयल, अध्यक्ष, श्री चावल उद्योग संघ, बूंदी

– राजेश तापडिय़ा, पूर्व अध्यक्ष, श्री चावल उद्योग संघ, बूंदी
– राजस्थान में बिजली की प्रोपर सप्लाई नहीं है। इस कारण उद्योग खस्ता हालत में है। दूसरा मिलों से निकलने वाला पानी बॉयोलॉलिकल ट्रीटेड होता है। यह पानी खेतों के लिए काफी अच्छा है और खेती-बाड़ी काफी अच्छी होती है। इसमें मैन समस्या बीओडी की होती है, लेकिन यही बीओडी खेती के लिए फर्टिलाइजर का काम करती है। अगर मिलों से निकलने वाले पानी को ट्रीट न कराएं तो ऑपरेशनल कॉस्ट कम हो सकती है। इसी वजह से ऑपरेशनल कॉस्ट कम्पीटिव नहीं रही। पंजाब, हरियाणा, बंगाल व यूपी के बोर्ड ने वहां की इंडस्ट्री को ऐसी रियायतें दे रखी हैं। अब हिंदुस्तान तो एक है तो हम हर राज्य में नियम अलग-अलग होंगे तो मुकाबला कैसे करेंगे। राजस्थान में बिजली भी महंगी है। नेशनल सिनेरियों में देखें तो केंद्र सरकार की पॉलिसी अनिश्चित हैं। यह अनिश्चितता ग्लोबल मार्केट में नहीं चलती है। सरकार की इन्हीं नीतियों की वजह से भारत का एक्सपोर्ट पिट रहा है।
– राजेश तापडिय़ा, पूर्व अध्यक्ष, श्री चावल उद्योग संघ, बूंदी

– भानू न्याती, ऑनर, तानसेन फूड प्राइवेट लिमिटेड, बूंदी
– बासमती चावल के एक्सपोर्ट पर जो एनईपी लगाई हुई है, उसे समाप्त किया जाए या घटाया जाए। दूसरा बासवमी चावल की टुकड़ी के एक्सपोर्ट पर बैन है, उसे खोला जाए। इस कारण व्यापारियों को काफी मंदी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरा जो 20 प्रतिशत ड्यूटी लगी हुई है। इससे पूरा मार्केट कै्रश हो गया है। राइस इंडस्ट्री का यह पूरा साल खराब हो चुका है। सरकार की पॉलिसियों से व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। नकारात्मक पॉलिसियों की वजह से इंडस्ट्री बहुत बुरे दौर में है। दूसरे राज्य में बिजली कटौती की वजह से इंडस्ट्री को चलाना मुश्किल हो रहा है। एक तो महंगी बिजली उपर से कटौती। इससे व्यापारियों को काफी नुकसान हो रहा है। सरकार केवल कागज पर चलती है। अगर इस पानी का ट्रीटमेंट न कर खेती के उपयोग में लिया जाए तो यह काफी अच्छा है। इस पानी में कोई कैमिकल नहीं होता है, लेकिन सरकारी अड़ंगे चलते रहते हैं।
– भानू न्याती, ऑनर, तानसेन फूड प्राइवेट लिमिटेड, बूंदी

– विदेश में चावल निर्यात करने के लिए सरकार ने एनईटी लगा रखी है। इसे तत्काल हटाया जाना चाहिए। साथ ही 20 प्रतिशत ड्यूटी को भी हटाया जाना चाहिए। वर्तमान में चावल उद्योग काफी मंदी की चपेट में है। इसलिए व्यापार को बचाने के लिए इन दोनों चीजों को तत्काल हटाया जाना चाहिए।
– महावीर झवर, पैरामाउंट राइस, बूंदी

