हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आज विश्व कपास दिवस मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य कपास की वैश्विक अर्थव्यवस्था, रोजगार और व्यापार की भूमिका को रेखांकित करना है। भारतीय कृषि और वैश्विक वस्त्र उद्योग में कपास केवल एक फसल नहीं, बल्कि श्वेत स्वर्ण माना जाता है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और करोड़ों श्रमिकों की आजीविका की रीढ़ है। कपास केवल वस्त्र उद्योग का कच्चा माल नहीं, बल्कि किसानों, श्रमिकों, जिनिंग इकाइयों, कपड़ा उद्योग और निर्यात क्षेत्र की लंबी आर्थिक शृंखला का आधार है। इसी कारण कपास उत्पादकों की आय, उत्पादन लागत और बाजार से जुड़ी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है। इस दिवस की शुरुआत वर्ष, 2019 को विश्व व्यापार संगठन के मुख्यालय में हुई थी। बेनिन, बुर्किना फासो, चाड और माली ने इसकी पहल की थी। बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अगस्त, 2021 में 7 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से विश्व कपास दिवस के रूप में मान्यता प्रदान की। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य कपास उत्पादन से जुड़े किसानों और श्रमिकों को वैश्विक पहचान देना, टिकाऊ कपास उत्पादन को बढ़ावा देना और विकासशील देशों को कपास मूल्य शृंखला का अधिक लाभ दिलाना है। भारत के लिए इस दिवस का विशेष महत्व है, क्योंकि कपास देश के कृषि और वस्त्र उद्योग दोनों से सीधे जुड़ी महत्वपूर्ण फसल है। किसानों के सामने कम उत्पादकता, कीटों का प्रकोप, मौसम की अनिश्चितता, उत्पादन लागत और उचित मूल्य जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सलाह और बाजार सुरक्षा भी उपलब्ध करानी होगी। इसी दिशा में केंद्र सरकार ने वर्ष, 2026 में कपास उत्पादकता के लिए मिशन—कपास क्रांति को मंजूरी दी है। इसके अंतर्गत अनुसंधान, कपास उत्पादकता में सुधार, किसानों तक उन्नत तकनीक पहुंचाने तथा कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के माध्यम से कपास क्षेत्र को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाएगा। इन योजनाओं के क्रियान्वयन से भारतीय कपास उत्पादक किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी और देश एक बार फिर वैश्विक वस्त्र बाजार में सिरमौर बनकर उभरेगा।

