हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आज पूरी दुनिया में विश्व हृदय दिवस मनाया जाएगा। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को हृदय रोगों के प्रति जागरूक करना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लेना है। इस दिवस की शुरुआत वर्ष 1999 में विश्व हृदय महासंघ की ओर से विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से की गई थी और वर्ष 2000 में पहली बार 24 सितंबर को यह दिवस मनाया गया था, लेकिन वर्ष 2011 से इसे हर साल 29 सितंबर को मनाया जाने लगा। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हृदय रोग एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनकर सामने आ रहे हैं। बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान, तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण हृदय रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पहले जहां हृदय संबंधी बीमारियां अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थीं, वहीं अब कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। वर्तमान समय में हृदय रोगों में वृद्धि के कई कारण जिम्मेदार हैं। फास्ट फूड और अधिक तेल-नमक वाले भोजन का सेवन, धूम्रपान, शराब का अत्यधिक सेवन, मोटापा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और लगातार मानसिक तनाव हृदय को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत और व्यायाम की कमी भी हृदय रोगों का बड़ा कारण बन रही है। हृदय को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तनाव नियंत्रण बेहद जरूरी है। हरी सब्जियों, फलों और पौष्टिक आहार को जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए। धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाना, नियमित स्वास्थ्य जांच करवाना और रक्तचाप व शुगर को नियंत्रित रखना हृदय रोगों से बचाव में मददगार साबित हो सकता है। वहीं हृदय रोगों की बढ़ती चुनौती को देखते हुए सरकार को स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों को और मजबूत करने की आवश्यकता है। स्कूलों और कार्यस्थलों पर स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देना, ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना और समय-समय पर मुफ्त जांच शिविरों का आयोजन करना जरूरी है। हृदय हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। इसकी देखभाल केवल बीमारी के समय नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की आदतों के रूप में करनी चाहिए।

