Sunday, August 30, 2026 |
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लकड़ी का कारोबार नियमों के जंगल में

by Business Remedies
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राजस्थान में Timber उद्योग पर बढ़ता Regulation और घटती कारोबारी सहजता

राजधानी जयपुर से पूरे प्रदेश तक दिख रहा असर

कच्चे माल की उपलब्धता, Transit Permit और नई पेड़ संरक्षण व्यवस्था बनी बड़ी चिंता

जयपुर | बिजनेस रेमेडीज

राजस्थान का Timber और Wood-Based कारोबार इन दिनों दोहरी चुनौती से गुजर रहा है। एक तरफ निर्माण, Furniture, Packaging, Plywood और अन्य लकड़ी आधारित गतिविधियों के कारण लकड़ी की मांग बनी हुई है, दूसरी तरफ वैध कच्चे माल की उपलब्धता, परिवहन संबंधी प्रक्रियाएं, आरा मशीनों की अनुमति और Environmental Rules का Compliance कारोबार की लागत और समय दोनों बढ़ा रहा है।

राजस्थान वन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य में लकड़ी की मांग लंबे समय से स्थानीय वन क्षेत्र की आपूर्ति से काफी अधिक रही है। 2016 में Timber की मांग 3.40 मिलियन Cubic Meter और आपूर्ति 3.99 मिलियन Cubic Meter थी। जबकि राज्य की कुल मांग करीब 2 मिलियन Cubic Meter और वन क्षेत्र से आने वाली आपूर्ति करीब 0.56 मिलियन Cubic Meter बताई गई है। शेष लकड़ी कृषि क्षेत्रों अथवा दूसरे राज्यों से आती है। पहले यह लकड़ी असम से आती थी, लेकिन वहां की सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाने से यह लकड़ी गुजरात से आने लगी, लेकिन वहां भी नियमों की उलझन ने कारोबार को धीमा कर दिया है।

जयपुर में कारोबार पर कितना असर?

राजधानी जयपुर राजस्थान के प्रमुख व्यापारिक और निर्माण बाजारों में शामिल है। यहां Timber का कारोबार केवल लकड़ी बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि आरा मशीनों, Furniture, दरवाजे-खिड़कियां, Interior और निर्माण गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ है। राज्य की Factory List में जयपुर में कई Wood-Sawing इकाइयों का उल्लेख मिलता है। हालांकि यह सूची 2018 की है और इससे वर्तमान इकाइयों की संख्या निकालना उचित नहीं होगा, लेकिन यह इस बात का दस्तावेजी संकेत जरूर देती है कि जयपुर में लकड़ी प्रसंस्करण का औद्योगिक आधार मौजूद रहा है।

वर्तमान में कारोबार की गति हो रही प्रभावित

जयपुर के कारोबारियों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि बाहर से आने वाली लकड़ी की वैधता और उसके दस्तावेजों की जांच कारोबार की गति को प्रभावित कर सकती है। राजस्थान के वन उत्पाद परिवहन नियमों के तहत लकड़ी की आवाजाही के लिए मूल स्रोत, मात्रा, गंतव्य और वाहन सहित विभिन्न विवरण दर्ज करने की व्यवस्था है।

राज्य के वन विभाग की मौजूदा Website पर आज भी Rajasthan Forest Produce Transit Rules, 1957 को लागू नियमों में सूचीबद्ध किया गया है। दूसरी तरफ, कई प्रजातियों को परिवहन नियमों से छूट भी दी गई है। मसलन विलायती बबूल, इजरायली बबूल, सुबबूल और अरडू को पूरे राजस्थान में छूट प्राप्त है। देशी बबूल, Eucalyptus और शीशम को भी अधिकांश क्षेत्रों में छूट है, लेकिन कुछ जिलों और तहसीलों को इससे बाहर रखा गया है। Poplar के मामले में भी श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ को अपवाद बनाया गया है।

यानी कारोबारियों के सामने समस्या केवल Permit की ही नहीं, बल्कि कौन-सी लकड़ी, कहां से आई, किस इलाके में जा रही है और उस पर कौन-सा नियम लागू है, इसकी जटिलता की भी है।

सबसे बड़ी चिंता: कच्चे माल की लागत

राजस्थान में प्राकृतिक वन क्षेत्र देश के कई राज्यों की तुलना में सीमित है और वन विभाग खुद राज्य में वन उत्पादकता को कम बताता है। ऐसे में Timber कारोबार को बड़ी मात्रा में कृषि क्षेत्र से प्राप्त लकड़ी अथवा दूसरे राज्यों से आने वाले कच्चे माल पर निर्भर रहना पड़ता है। इसका सीधा असर Transportation Cost, Stock रखने की लागत और अंततः तैयार लकड़ी तथा Furniture की कीमत पर पड़ता है।

Timber कारोबारी के लिए लकड़ी खरीदने के बाद उसका Transportation, Documentation, जांच, Storage और Processing—हर चरण पर Compliance जरूरी होता है। कारोबारियों का तर्क सामान्य तौर पर यही रहता है कि वैध लकड़ी और अवैध कटाई के बीच स्पष्ट अंतर करते हुए Rules को सरल बनाया जाए, ताकि ईमानदारी से कारोबार करने वाले व्यापारियों को अनावश्यक देरी या अतिरिक्त लागत का सामना न करना पड़े।

आरा मशीन और Wood-Based उद्योग भी नियमों के दायरे में

राजस्थान वन विभाग के अनुसार Saw-Mill से संबंधित गतिविधियां वन संरक्षण विंग के कार्यक्षेत्र में आती हैं। विभाग Transit Permit, NOC और Saw-Mill संबंधी Rules के क्रियान्वयन की निगरानी करता है। विभाग की नागरिक सेवाओं में गैर-वन भूमि पर उद्योग लगाने के लिए Saw-Mill Permission को भी अनुमति की श्रेणी में रखा गया है। आवेदन प्रक्रिया Online System से जुड़ी हुई है।

यहीं से Timber कारोबारियों की दूसरी बड़ी शिकायत सामने आती है—व्यवस्था Digital होने के बावजूद Rules और Permissions की संख्या कम नहीं हुई है। कारोबारियों की अपेक्षा है कि जहां लकड़ी का स्रोत पूरी तरह वैध और दस्तावेजी हो, वहां Transportation और Processing के लिए Single Window व्यवस्था विकसित की जाए।

पूरे राजस्थान में कारोबार की स्थिति?

राज्य में Timber कारोबार को एक समान Industry मानना मुश्किल है। अलग-अलग जिलों में इसका स्वरूप स्थानीय संसाधन और बाजार की जरूरत के अनुसार बदल जाता है। कृषि क्षेत्र से लकड़ी मिलने वाले इलाकों में Eucalyptus, Poplar, शीशम और बबूल जैसी प्रजातियों का महत्व है।

वहीं जयपुर जैसे बड़े शहरों में Timber का संबंध निर्माण, Interior और Furniture Market से ज्यादा है। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश में Timber Industry का आधार मौजूद है, लेकिन इसकी प्रकृति स्थानीय लकड़ी, कृषि-वानिकी, दूसरे राज्यों से Import और शहरी मांग—इन सभी पर निर्भर है।

अब नई चुनौती: 29 प्रजातियों पर प्रस्तावित संरक्षण कानून

Timber कारोबारियों के लिए 2026 में एक नया महत्वपूर्ण मुद्दा राजस्थान Tree Protection Bill है। 13 अगस्त 2026 को राज्य मंत्रिमंडल ने राजस्थान Tree Protection Bill को मंजूरी दी। प्रस्तावित कानून में 29 प्रजातियों के पेड़ों को संरक्षण देने की बात है, जिनमें खेजड़ी, रोहिड़ा और पीपल जैसी प्रजातियां शामिल हैं।

प्रस्तावित व्यवस्था में संरक्षित पेड़ों की कटाई पर Permission की आवश्यकता और उल्लंघन पर जुर्माने तथा सजा का प्रावधान बताया गया है। पर्यावरण की दृष्टि से यह कदम महत्वपूर्ण है, लेकिन Timber कारोबार के लिए इसकी सबसे बड़ी चिंता व्यावहारिक क्रियान्वयन को लेकर हो सकती है।

व्यापारियों के लिए सवाल यह है कि निजी जमीन से वैध रूप से प्राप्त लकड़ी के मामले में Documents कैसे जारी होंगे, Permission कितने समय में मिलेगी, लकड़ी के Transportation के लिए कौन-सा प्रमाण मान्य होगा और एक ही लकड़ी पर वन विभाग तथा नए Tree Protection Law के तहत अलग-अलग प्रक्रियाओं को कैसे जोड़ा जाएगा।

यही वजह है कि व्यापार जगत की मांग Rules खत्म करने की बजाय Rules को स्पष्ट और समयबद्ध बनाने की दिशा में हो सकती है।

टिंबर व्यापारियों की सरकार से प्रमुख मांगें

उपलब्ध सरकारी नियमों और उद्योग की व्यावहारिक जरूरतों को देखते हुए Timber व्यापारियों की ओर से सरकार के सामने निम्न प्रमुख मांगें रखी जा रही हैं-

1. Transit Permit व्यवस्था को सरल किया जाए और पूरी प्रक्रिया को Online, समयबद्ध तथा पारदर्शी बनाया जाए।

2. वैध कृषि-वानिकी से प्राप्त लकड़ी के लिए Source Certificate की सरल व्यवस्था हो।

3. अलग-अलग प्रजातियों और क्षेत्रों के लिए लागू छूटों की एक स्पष्ट, Updated Digital List जारी की जाए।

4. वन विभाग, Saw-Mill अनुमति और अन्य संबंधित मंजूरियों के लिए Single-Window प्रणाली लागू की जाए।

5. जांच के दौरान वैध Documents रखने वाले व्यापारियों को अनावश्यक रोक-टोक से बचाने के लिए Standard Checking Procedure तय की जाए।

6. प्रस्तावित Tree Protection Law में व्यापारियों और किसानों के लिए स्पष्ट Rules, Appeal व्यवस्था और समयबद्ध Permission Process रखी जाए।

7. कृषि भूमि पर उगाई गई ऐसी प्रजातियों, जिन पर संरक्षण प्रतिबंध लागू नहीं है, उनके कटान और Transportation को आसान बनाया जाए।

8. छोटे आरा मशीन संचालकों और Wood-Based Industry को कम Compliance Cost और आसान Financial Assistance उपलब्ध कराई जाए।

9. लकड़ी आधारित Industries के Modernization के लिए Machinery, Energy Efficiency और Waste-Wood के उपयोग को प्रोत्साहन मिले।

10. राज्य सरकार एक Rajasthan Wood-Based Industry Policy अथवा समेकित Policy पर विचार करे, जिसमें Timber Trade, Saw-Mill, Furniture और Wood Processing को एक साथ देखा जाए।

कारोबार के सामने तीन स्तर की चुनौती

राजस्थान के Timber Industry की मौजूदा स्थिति को तीन स्तरों पर समझा जा सकता है।

1. पहली चुनौती: कच्चा माल। राज्य की अपनी प्राकृतिक वन आपूर्ति सीमित है, इसलिए कृषि क्षेत्र और दूसरे राज्यों से आने वाली लकड़ी पर निर्भरता महत्वपूर्ण है।

2. दूसरी चुनौती: Rules और Compliance। Transit Rules, Source Certificate, Saw-Mill अनुमति और विभिन्न NOC के कारण छोटे व्यापारियों के लिए Compliance महंगा और जटिल हो सकता है। राजस्थान वन विभाग की व्यवस्था में इन सभी पहलुओं का नियमन मौजूद है।

3. तीसरी चुनौती: भविष्य का Environmental Regulation। 29 प्रजातियों को संरक्षण देने वाले प्रस्तावित नए Law के बाद पेड़ कटान और लकड़ी के Source से जुड़े Rules और महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

जयपुर से निकल सकता है समाधान का रास्ता

जयपुर राज्य का बड़ा व्यापारिक और प्रशासनिक केंद्र होने के कारण Timber कारोबार की समस्याओं के समाधान के लिए महत्वपूर्ण स्थान रखता है। अगर सरकार Timber व्यापारियों, Saw-Mill संचालकों, Furniture Industry, किसानों और वन विभाग को एक मंच पर लाकर Rules की समीक्षा करे तो कई व्यावहारिक अड़चनें दूर हो सकती हैं।

खासकर ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जिसमें अवैध लकड़ी पर सख्ती और वैध लकड़ी के कारोबार में आसानी—दोनों साथ-साथ चलें। राजस्थान सरकार पहले से व्यापार और उद्योग के लिए Single-Window तथा विवाद समाधान जैसे तंत्र विकसित कर चुकी है। राज्य के औद्योगिक सुधार दस्तावेज में भी व्यवसायों के लिए Integrated Approval System और विवाद समाधान तंत्र का उल्लेख है। अब जरूरत इस Model को Timber और Wood-Based Industry तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की है।

सरकार इस पर करे विचार तो मिले राहत

राजस्थान का Timber कारोबार खत्म होने की स्थिति में नहीं है, लेकिन वह परंपरागत व्यापार Model से अधिक Regulated और Documentation-Based कारोबार की ओर बढ़ रहा है। मांग का आधार मौजूद है और लकड़ी का इस्तेमाल निर्माण, Furniture तथा अन्य Industries में जारी है। चुनौती यह है कि वैध कच्चा माल समय पर और उचित लागत पर उपलब्ध हो तथा उसे बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया सरल हो।

सरकार के लिए असली संतुलन यही है—पेड़ों की सुरक्षा भी हो और वैध Timber कारोबार भी चलता रहे। यदि Transit Permit, Saw-Mill अनुमति, लकड़ी के Source और प्रस्तावित Tree Protection Law के बीच स्पष्ट Digital Coordination बना दिया जाए तो राजस्थान का Wood-Based Industry पर्यावरण संरक्षण के साथ आगे बढ़ सकता है।

Plywood काफी हद तक लकड़ी पर निर्भर है। पहले असम से काफी Plywood Supply होता था, लेकिन अब हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान आदि में काफी Plywood Industries खुल गई हैं। गुजरात के गांधीधाम में बाहर से काफी मात्रा में Timber आ रहा है, जो पूरे देश में Supply होता है। इसमें एक प्रमुख लकड़ी Pine है, जो Timber के साथ-साथ Plywood में भी काम आ रही है। Timber पर राजस्थान सरकार द्वारा Mandi Tax वसूल किया जा रहा है, जिसका कोई औचित्य नहीं है।

हरियाणा और उत्तर प्रदेश में Poplar लकड़ी के Ply Boards काफी मात्रा में बनते हैं, लेकिन अब धीरे-धीरे लकड़ी की कमी हो रही है। सरकार द्वारा भी अब जंगल सीमित होने के कारण Rules और Regulations Tight किए जा रहे हैं। इस कारण Timber एवं Plywood का भविष्य आने वाले समय में बहुत मुश्किल दौर में जाएगा।

मेरा व्यवसाय भी Timber एवं Plywood का है, जिसकी स्थापना मैंने 1997 में की थी। यह झोटवाड़ा Industrial Area में मैसर्स आर.बी. Timber एंड Plywood के नाम से है। मेरा व्यवसाय Wholesale पर आधारित है, जिससे मैं समस्त राजस्थान में Plywood Supply करता हूं।

मैं सामाजिक क्षेत्र में खंडेलवाल समाज झोटवाड़ा का अध्यक्ष रहा हुआ हूं एवं वर्तमान में उच्च माध्यमिक आदर्श विद्या मंदिर स्कूल झोटवाड़ा की प्रबंध समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य देख रहा हूं एवं अखिल भारतवर्षीय खंडेलवाल वैश्य समाज का कार्यकारिणी सदस्य भी हूं।

मैं पिछले 15 साल से सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों से जुड़ा हुआ हूं एवं समय-समय पर अपना पूर्ण सहयोग एवं योगदान देता हूं।

उमेश कुमार रावत, ऑनर, आर.बी.टिम्बर एण्ड प्लाइवुड



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