समानता, समृद्धि, भाईचारे और सामूहिक आनंद का त्योहार ओणम यानी तिरुवोणम आज मनाया जाएगा। यह त्योहार केरल की सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है और देश-विदेश में रहने वाले मलयाली समुदाय भी इसे मनाते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, ओणम का त्योहार केरल के महान और न्यायप्रिय असुर राजा महाबली के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए मनाया जाता रहा है। महाबली का राज्य समृद्धि और प्रजा के कल्याण के लिए प्रसिद्ध था। यह मान्यता है कि महाबली एक अत्यंत न्यायप्रिय और लोकप्रिय असुर राजा थे। उनके शासन में प्रजा सुखी और समृद्ध थी। उनकी बढ़ती लोकप्रियता और शक्ति के कारण देवताओं को चिंता हुई। तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और महाबली से तीन पग भूमि मांगी। महाबली ने वचन दे दिया। वामन ने विराट रूप धारण किया—एक पग में पृथ्वी और दूसरे में आकाश नाप लिया। तीसरे पग के लिए महाबली ने अपना सिर प्रस्तुत कर दिया। इसके बाद उन्हें पाताल लोक जाने का वर मिला, लेकिन उन्हें यह अनुमति भी मिली कि वे हर वर्ष अपनी प्रजा से मिलने के लिए वापस आ सकें। ओणम इसी वार्षिक आगमन की खुशी के रूप में मनाया जाता है। यह भी माना जाता है कि ओणम की परंपराएं केवल एक धार्मिक कथा तक सीमित नहीं हैं, यह केरल की कृषि, लोक-संस्कृति और सामुदायिक जीवन से भी जुड़ा त्योहार है। इस दिन परिवार पारंपरिक रूप से अपने घरों की सफाई और सजावट करते हैं, पूक्कलम या फूलों की सजावट करते हैं। पारंपरिक कपड़े पहनते हैं और भव्य ओणम साद्या के लिए एक साथ आते हैं। यह त्योहार बताता है कि अच्छा राजा वही है, जो प्रजा को खुश रखे और असली समृद्धि तब है, जब सब बराबर हों।

