प्रमुख चीनी उत्पादक देश ब्राजील ने बिगाड़ा खेल
भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में चीनी की कीमत में इजाफा हो रहा
नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क
पूरी दुनिया में चीनी का संकट गहराता दिख रहा है। प्रमुख उत्पादक देश ब्राजील ने अपनी गन्ने की फसल का बड़ा हिस्सा एथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ दिया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत सहित कई देशों में चीनी की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ही घरेलू बाजार में दाम चढऩे से मिठास महंगी पड़ रही है। सरकार के अनुसार, वर्तमान सीजन में चीनी का उत्पादन लगभग 306 लाख मीट्रिक टन रहने की उम्मीद है। गन्ना उत्पादक राज्यों ने शुरुआती अनुमान लगभग 343 लाख मीट्रिक टन लगाया था, लेकिन गन्ने की फसल रेड रॉट (लाल सडऩ) और टॉप बोरर रोग से प्रभावित हुई। समय से पहले ज्यादा बारिश के कारण हुए जलभराव ने भी नुकसान पहुंचाया। नतीजतन उत्पादन अनुमान से करीब 11 प्रतिशत कम रह गया।
कीमत बढऩे के मुख्य कारण
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का कहना है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी कई कारकों के संयोजन से हो रही है। इनमें प्रमुख हैं—घरेलू उत्पादन का अनुमान से कम होना, त्योहारी मौसम से पहले मांग में बढ़ोतरी, मौसम संबंधी नुकसान, वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में कमी तथा उद्योग के कुछ वर्गों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी। अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 20 जुलाई को 48.18 रुपए प्रति किलोग्राम से बढक़र 20 अगस्त को 55.70 रुपए प्रति किलोग्राम पहुंच गई। कुछ बाजारों में यह 60-65 रुपए तक भी चढ़ गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमतें 30 जून के 474 डॉलर प्रति टन से बढक़र 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गईं।
ब्राजील ने बिगाड़ा खेल
दुनिया में गन्ने की सबसे ज्यादा खेती करने वाले ब्राजील (वैश्विक गन्ना उत्पादन का करीब 24 प्रतिशत) में भी संकट गहरा रहा है। भारत का हिस्सा लगभग 16 प्रतिशत है। ब्राजील अपनी गन्ने को एथेनॉल उत्पादन की तरफ ज्यादा मोड़ रहा है। राष्ट्रीय आपूर्ति कंपनी कोनाब के मुताबिक, चीनी उत्पादन में करीब 2.9 से 3 प्रतिशत की कटौती की संभावना है। अनुमान है कि ब्राजील में चीनी उत्पादन लगभग 42.9 मिलियन टन रह सकता है। इस वैश्विक दबाव के कारण भारत सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। ब्राजील से आने वाली शुरुआती खेप अक्टूबर मध्य तक पहुंच सकती है।
सरकार का दावा : भंडार पर्याप्त
उत्पादन कम होने के बावजूद सरकार का दावा है कि देश में पर्याप्त चीनी का भंडार उपलब्ध है। यह अक्टूबर में नए पेराई सीजन की शुरुआत तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त रहेगा। मिलों को 15 अक्टूबर से क्रशिंग शुरू करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, 2026-27 में वैश्विक स्तर पर करीब 33 लाख टन चीनी की कमी का अनुमान है। मौसम संबंधी अनिश्चितताओं (जैसे अल नीनो) और एथेनॉल की बढ़ती मांग ने आपूर्ति को और तंग कर दिया है। त्योहारों से पहले सरकार जमाखोरी रोकने, स्टॉक लिमिट सख्त करने और आयात बढ़ाने जैसे कदम उठा रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। चीनी का यह संकट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर रहा है।
कच्ची चीनी के आयात नियमों में बदलाव
दूसरी ओर केंद्र सरकार ने शुल्क-मुक्त आयात की गई कच्ची चीनी के प्रसंस्करण और बिक्री की समयसीमा में बदलाव किया है। अब आयातकों को बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से अधिकतम दो महीने का समय मिलेगा। इस सीमा के अंदर उन्हें कच्ची चीनी को सफेद या रिफाइंड चीनी में बदलकर घरेलू बाजार में बेचना होगा। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने अगस्त की शुरुआत में अधिसूचित उन नियमों में संशोधन किया है, जिनके तहत टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) योजना के अंतर्गत 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी गई थी।

