Friday, August 14, 2026 |
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कानून में बदलाव से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमियों को मिल सकेगी राहत

by Business Remedies
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केंद्र सरकार ने पिछले दिनों कानून में बदलाव कर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमियों को राहत दी है। इस कानून को राज्यसभा ने 3 अगस्त और लोकसभा ने 7 अगस्त को पारित किया है। इस कानून के बदलाव से उद्यमियों को अटका हुआ पैसा जल्दी मिलने की व्यवस्था हो सकेगी। छोटे उद्योगों की सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि माल देने के बाद बड़ी कंपनी, सरकारी संस्था या खरीदार का भुगतान महीनों तक अटका रहता है। नए संशोधन में इस समस्या पर विशेष जोर दिया गया है। केंद्र की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को एमएसएमई से खरीदी गई वस्तुओं व सेवाओं के बिलों का निपटान टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म के जरिए करना होगा। ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (टीआरईडीएस) में एमएसएमई अपना बकाया बिल जल्दी डिस्काउंट कराकर नकदी प्राप्त कर सकता है। राज्यों को भी अपने सार्वजनिक उपक्रमों में टीआरईडीएस के इस्तेमाल को बढ़ावा अनिवार्य करने की व्यवस्था की गई है। नए नियमों के तहत समय पर भुगतान ना मिलने की स्थिति से निपटने के लिए ऑनलाइन विवाद समाधान और सख्त समय-सीमा तय की गई है। यदि कोई मामला 6 महीने से अधिक अटका रहता है, तो अदालतों को सूक्ष्म और लघु उद्यमों को कम से कम 50 फीसदी भुगतान का आदेश देने का अधिकार होगा। छोटे व्यवसायों पर कानूनी और कागजी कार्रवाई का बोझ कम किया गया है। निवेश और सालाना टर्नओवर की सीमा बढ़ाए जाने से कई उभरते हुए उद्योग बिना लाभ खोए एमएसएमई श्रेणी में बने रह सकते हैं। इससे समय पर पैसे मिलने से उद्योगों के पास कार्यशील पूंजी की कमी नहीं होगी। मध्यस्थता और पंचाट के लिए तय समय-सीमा होने से मामलों का फैसला तेजी से होगा। अनुपालन सरल होने और डिजिटल प्लेटफॉर्म के मजबूत होने से छोटे उद्योग मेक इन इंडिया और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में आसानी से जुड़ सकेंगे। वहीं पाली के टेक्सटाइल, मेहंदी, हैंडीक्राफ्ट एमएसएमई को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा, क्योंकि एक्सपोर्ट और सीपीएसई सप्लाई दोनों यहां ज्यादा होती है।



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