Wednesday, July 15, 2026 |
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SEBI ने कर्मचारियों के लिए Service Rules सख्त किए

निवेश और हितों के टकराव पर नए प्रावधान लागू

by Business Remedies
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SEBI Introduces Stricter Service Rules And Investment Norms For Employees

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ( SEBI ) ने अपने कर्मचारियों के सेवा नियमों में व्यापक बदलाव करते हुए हितों के टकराव को रोकने, निवेश संबंधी नियमों को अधिक सख्त बनाने और जानकारी साझा करने से जुड़े प्रावधानों को और मजबूत कर दिया है। नए संशोधित सेवा नियमों के तहत कर्मचारियों के आचरण, निवेश और पारदर्शिता से जुड़े कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए गए हैं, जिनका उद्देश्य नियामक संस्था की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को और मजबूत करना है। संशोधित नियमों के अनुसार अब “परिवार” और “आश्रित” की परिभाषा का दायरा बढ़ा दिया गया है। इसमें गोद लिए गए बच्चे, सौतेले बच्चे और ऐसे व्यक्ति भी शामिल होंगे, जो किसी कर्मचारी पर काफी हद तक आर्थिक रूप से निर्भर हैं। इस बदलाव के बाद निवेश, जानकारी साझा करने और अन्य सेवा संबंधी नियमों का पालन करने की जिम्मेदारी पहले की तुलना में अधिक व्यापक हो जाएगी।

नए नियमों के तहत SEBI से सेवानिवृत्त होने या इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों के लिए 2 वर्ष की Cooling-Off अवधि लागू की गई है। इस अवधि के दौरान पूर्व कर्मचारी किसी भी व्यक्ति या संस्था का प्रतिनिधित्व SEBI के समक्ष किसी भी कार्यवाही, निर्णय प्रक्रिया, समझौते या स्वीकृति से जुड़े मामलों में नहीं कर सकेंगे। इस कदम का उद्देश्य सेवा समाप्त होने के बाद संभावित हितों के टकराव को रोकना है। इसके अलावा यदि कोई कर्मचारी किसी अन्य संस्थान में नौकरी के लिए बातचीत शुरू करता है, तो उसे ऐसी चर्चा शुरू होने के 1 महीने के भीतर इसकी जानकारी SEBI को देना अनिवार्य होगा। इससे भविष्य में किसी भी प्रकार के हितों के टकराव की संभावना को कम करने में मदद मिलेगी और नियामक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी।

संशोधित नियमों में कर्मचारियों के निवेश संबंधी प्रावधानों को भी काफी सख्त बनाया गया है। अब SEBI में कार्यरत कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य नौकरी के दौरान शेयर, शेयर में परिवर्तित होने वाले वित्तीय साधनों तथा डेरिवेटिव में नया निवेश नहीं कर सकेंगे। हालांकि, म्यूचुअल फंड, रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट और अन्य विनियमित सामूहिक निवेश माध्यमों के जरिए निवेश की अनुमति पहले की तरह जारी रहेगी। नए नियमों के अनुसार कुछ विनियमित निवेश उत्पादों में किसी कर्मचारी का कुल निवेश उसके संपूर्ण निवेश पोर्टफोलियो के 25 प्रतिशत तक ही सीमित रहेगा। हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में सीमित छूट भी दी गई है। उदाहरण के लिए, जीवनसाथी को कर्मचारी शेयर विकल्प के रूप में मिलने वाले लाभ या विवेकाधीन पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा के तहत किए गए निवेश इस सीमा से बाहर रखे जा सकते हैं।

उपहार स्वीकार करने से जुड़े नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब कर्मचारियों को केवल उन उपहारों की जानकारी देनी होगी जिनका मूल्य ₹.50,000 या उससे अधिक होगा। इससे पहले यह सीमा ₹.10,000 थी। साथ ही, पारंपरिक और सामान्य सामाजिक अवसरों पर दिए जाने वाले उपहारों के संबंध में भी नियमों को अधिक स्पष्ट बनाया गया है, ताकि कर्मचारियों को व्यवहारिक परिस्थितियों में अनावश्यक कठिनाई का सामना न करना पड़े। इन संशोधनों के माध्यम से SEBI ने कर्मचारियों के आचरण, निवेश और पारदर्शिता से जुड़े नियमों को पहले की तुलना में अधिक सुदृढ़ बनाया है। इन नए प्रावधानों का उद्देश्य पूंजी बाजार के नियामक के रूप में संस्था की निष्पक्षता, जवाबदेही और विश्वसनीयता को और मजबूत करना है।



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