केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला शुल्क बढ़ा दिया है, जबकि डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर शुल्क में कटौती की है। नई दरें Date 1 जुलाई से लागू हो गई हैं। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) बढ़ाकर ₹.4 प्रति लीटर कर दिया गया है, जो पहले ₹.1.5 प्रति लीटर था।
वहीं, डीजल के निर्यात पर शुल्क घटाकर ₹.8.5 प्रति लीटर कर दिया गया है, जो पहले ₹.14 प्रति लीटर था। इसी तरह विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर शुल्क भी घटाकर ₹.7.5 प्रति लीटर कर दिया गया है, जो पहले ₹.12.5 प्रति लीटर था। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोग के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर वर्तमान उत्पाद शुल्क में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि देश के भीतर पेट्रोल और डीजल की मौजूदा कर व्यवस्था पहले की तरह ही जारी रहेगी।
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी के बाद सरकार ने मार्च में डीजल और विमान ईंधन के निर्यात पर शुल्क लगाया था। इसके बाद 16 मई से पेट्रोल के निर्यात पर भी यह शुल्क लागू किया गया। सरकार इन शुल्कों की समीक्षा प्रत्येक पखवाड़े करती है ताकि घरेलू बाज़ार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और अत्यधिक निर्यात को नियंत्रित किया जा सके। पिछली समीक्षा के दौरान सरकार ने डीजल और विमान ईंधन पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाया था, जबकि पेट्रोल पर शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया था। उस समय डीजल पर शुल्क ₹.13.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹.14 प्रति लीटर किया गया था, जबकि विमान ईंधन पर शुल्क ₹.9.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹.12.5 प्रति लीटर कर दिया गया था।
इसके अलावा, सरकारी स्वामित्व वाली तेल विपणन कंपनियों ने Date 1 जुलाई से 19किलोग्राम वाले वाणिज्यिक एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत में अधिकतम ₹.183.5 तक की कटौती की है। इस फैसले से रेस्तरां, होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि विंडफॉल टैक्स का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के दौरान देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और अनियंत्रित निर्यात पर रोक लगाना है।

