भारत ने अपने प्रीमियम आमों के निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के उद्देश्य से पहली बार आइसलैंड में विशेष आम प्रचार कार्यक्रमों का आयोजन किया है। इस पहल के माध्यम से भारत ने अपनी प्रसिद्ध आम किस्मों का प्रदर्शन करते हुए दोनों देशों के बीच कृषि व्यापार को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
यह कार्यक्रम आइसलैंड की राजधानी रेक्याविक और उत्तर आइसलैंड के अकुरेयरी शहर में आयोजित किए गए। इनका आयोजन रेक्याविक स्थित भारतीय दूतावास ने कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से किया। इस अवसर पर आइसलैंड में भारत के राजदूत आर. रविंद्र ने भारतीय आमों की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की विश्व प्रसिद्ध आम किस्मों की गुणवत्ता, स्वाद और सुगंध उन्हें वैश्विक बाजार में अलग पहचान दिलाती है। उन्होंने कहा कि आइसलैंड के बाजार में भारतीय आमों के निर्यात की अपार संभावनाएं मौजूद हैं और दोनों देशों के बीच कृषि व्यापार को और अधिक विस्तार दिया जा सकता है।
आइसलैंड के विदेश मंत्रालय में व्यापार समझौता निदेशक स्वेइन के. एइनार्सन ने कहा कि भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए) लागू होने के बाद आइसलैंड में भारतीय आमों के आयात के नए अवसर खुल सकते हैं। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे। आइसलैंड व्यापार महासंघ के महासचिव ओलाफुर स्टीफेंसन ने भी भारत के प्रति आइसलैंड के कारोबारी समुदाय की बढ़ती रुचि का उल्लेख किया। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भारतीय कृषि उत्पादों, विशेषकर आमों के आयात में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है।
भारतीय दूतावास की द्वितीय सचिव अनीशा तोमर ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है। उन्होंने सरकार द्वारा गुणवत्ता सुनिश्चित करने, अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने और वैश्विक स्तर पर भारतीय कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी। सरकार के अनुसार, इन कार्यक्रमों में आयातकों, राजनयिक समुदाय के प्रतिनिधियों, आइसलैंड के व्यापारिक संगठनों तथा विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों को भारत की चार प्रमुख प्रीमियम आम किस्में — दशहरी, चौसा, लंगड़ा और केसर — चखने का अवसर मिला। इन सभी किस्मों को उनके उत्कृष्ट स्वाद, सुगंध और गुणवत्ता के लिए बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
इन आयोजनों ने केवल भारतीय आमों के प्रचार तक ही सीमित भूमिका नहीं निभाई, बल्कि भारत और आइसलैंड के बीच व्यावसायिक संबंधों को मजबूत करने तथा भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भी एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। वर्ष 2025 में आइसलैंड ने लगभग 33लाख अमेरिकी डॉलर मूल्य के आमों का आयात किया था। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा थाईलैंड का रहा, जहां से लगभग 10लाख अमेरिकी डॉलर मूल्य के आमों की आपूर्ति की गई। भारत अब इस बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराकर निर्यात बढ़ाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

