20 May : केंद्र सरकार अगले 5 वर्षों में पूर्वोत्तर क्षेत्र में अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजनाओं पर लगभग ₹.4,800 करोड़ निवेश करने की योजना बना रही है। इस योजना के तहत सामुदायिक जेट्टी, मालवाहक पोत, ड्रेजर और क्रूज़ टर्मिनल विकसित किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से अंतिम छोर तक संपर्क व्यवस्था मजबूत होगी, लॉजिस्टिक्स प्रणाली अधिक प्रभावी बनेगी और नदी किनारे बसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार ब्रह्मपुत्र बोर्ड को आधुनिक और तकनीक आधारित नदी बेसिन संगठन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत डिजिटल प्रशासन प्रणाली, डेटा आधारित परियोजना निगरानी और नॉर्थ ईस्टर्न हाइड्रोलिक एंड एलाइड रिसर्च इंस्टीट्यूट जैसी अनुसंधान संस्थाओं को फिर से सक्रिय करने की योजना शामिल है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ब्रह्मपुत्र नदी को बहुउद्देश्यीय आर्थिक गलियारे के रूप में विकसित करने के प्रयास तेज कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ब्रह्मपुत्र को केवल एक नदी नहीं बल्कि देश की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति मानती है, जो पूर्वोत्तर में संपर्क और आर्थिक विकास को नई गति दे सकती है।
उन्होंने बताया कि भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण ब्रह्मपुत्र नदी की वास्तविक क्षमता को विकसित करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। राष्ट्रीय जलमार्ग-2 के रूप में घोषित यह मार्ग असम और पूर्वोत्तर के अन्य हिस्सों को कोलकाता और हल्दिया बंदरगाहों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण परिवहन गलियारा बन चुका है। यह मार्ग भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल रूट के जरिए पर्यावरण के अनुकूल, किफायती और प्रभावी परिवहन व्यवस्था को भी बढ़ावा दे रहा है। असम में लगभग ₹.751 करोड़ की परियोजनाएं पहले ही पूरी की जा चुकी हैं। इनमें पांडु, धुबरी और जोगीघोपा में प्रमुख टर्मिनल, फ्लोटिंग जेट्टी और उन्नत तटीय सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा ₹.1,100 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं पर काम जारी है। इनमें ब्रह्मपुत्र नदी में फेयरवे विकास, जहाज मरम्मत केंद्र, पर्यटन जेट्टी और डिब्रूगढ़ में क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना शामिल है।
सर्बानंद सोनोवाल ने राज्यों में टिकाऊ जल प्रबंधन और सुधार योजनाओं को मजबूत करने के लिए शुरू किए गए स्टेट वॉटर रिफॉर्म्स फ्रेमवर्क की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि जीआईएस आधारित योजना और डिजिटल निगरानी जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए देश के जलमार्गों को हरित, प्रभावी और भविष्य के लिए तैयार परिवहन गलियारों में बदला जा रहा है, साथ ही क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन भी सुरक्षित रखा जाएगा। भारत में अंतर्देशीय जल परिवहन क्षेत्र, विशेष रूप से पूर्वोत्तर में, तेजी से विस्तार कर रहा है। राष्ट्रीय जलमार्गों पर माल परिवहन वर्ष 2014 में 18 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 218 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक पहुंच गया है। इससे स्पष्ट है कि देश की लॉजिस्टिक्स श्रृंखला में इस क्षेत्र की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।



