नई दिल्ली: में भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय Free Trade Agreement को लेकर दूसरे दौर की बातचीत शुरू हो गई है। यह पांच दिनों तक चलने वाली चर्चा दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को तेज करने के उद्देश्य से हो रही है। इस बैठक के बाद इस महीने के अंत में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का कनाडा दौरा भी प्रस्तावित है, जिससे इस समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया को और गति मिलेगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा पहले ही इस वर्ष यह निर्णय लिया गया था कि समझौते को वर्ष के अंत तक पूरा किया जाए। इसी दिशा में बातचीत को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि तय समयसीमा के भीतर सहमति बन सके।
इस समझौते का आधिकारिक नाम India-Canada Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) है। इसकी पहली बैठक मार्च2026 में हुई थी, जब कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद दोनों देशों के संबंधों में सुधार की दिशा स्पष्ट रूप से दिखाई दी। पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में दोनों देशों के संबंधों में गिरावट आई थी, क्योंकि उस समय कनाडा सरकार पर भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप लगे थे। लेकिन वर्तमान नेतृत्व के साथ संबंधों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।
मार्च में हुई बैठक में दोनों देशों ने ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई थी। संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों देशों ने वर्ष2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को CAD70बिलियन यानी लगभग ₹.4.65लाखकरोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, वर्ष2024-25 में भारत और कनाडा के बीच वस्तु व्यापार $8.66बिलियन रहा, जिसमें भारत का निर्यात $4.22बिलियन तक पहुंचा।
भारत से कनाडा को निर्यात होने वाले प्रमुख उत्पादों में औषधि उत्पाद, मशीनरी पार्ट्स, लौह और इस्पात सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक सामान, जैविक रसायन, आभूषण, कीमती पत्थर, वस्त्र, समुद्री खाद्य पदार्थ और ऑटो पार्ट्स शामिल हैं। वहीं कनाडा से भारत में आयात होने वाली प्रमुख वस्तुओं में दालें, उर्वरक, खनिज ईंधन, लकड़ी का गूदा, कीमती पत्थर, विमान पार्ट्स, मशीनरी और लौह व एल्यूमीनियम स्क्रैप शामिल हैं। सेवा क्षेत्र में भारत का सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र कनाडा के लिए निर्यात का मुख्य आधार बना हुआ है, जो दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत करता है।




