पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ईवी चार पहिया वाहनों का प्रचलन पिछले एक वर्ष में काफी बढ़ा है। जो करीब 80 से 85 फीसदी तक पहुंच गया है। जो आम लोगों के लिए राहत भरी खबर कही जा सकती है। यह बढऩा भी चाहिए, क्योंकि दिल्ली, राजस्थान में प्रदूषण की समस्या बहुत ही विकट हो गई है। अन्य राज्यों में भी ईवी वाहनों का उपयोग निरंतर बढ़ रहा है। ऐसे में ईवी की गाडिय़ां प्रदूषण को रोकने में कायम हो रही है। आने वाला भविष्य इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का ही रहेगा, ऐसी पूरी संभावना है। सरकार ने भी पीएम ई-ड्राइव योजना के माध्यम से सब्सिडी और नीतिगत समर्थन जारी रखा हुआ है, वहीं वर्ष, 2026 के बजट में ईवी को बढ़ावा देने के लिए और अधिक वित्तीय घोषणाएं की गई हैं। पर अभी ईवी वाहनों के समक्ष चुनौतियां भी हैं, जिनमें वाहनों का महंगा होना, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर्याप्त नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में अपनाने की गति धीमी और बैटरी और सर्विस नेटवर्क की सीमाएं होना प्रमुख है। इस कारण से लोग फिलहाल ईवी गाडियों को लेने से कतरा रहे हैं। अगर इसका इन चुनौतियों को दुरस्त कर लिया जाए तो निश्चित रूप से आने वाला समय ईवी गाडिय़ों का ही होगा। जहां वित्तीय वर्ष, 2025-26 में भारत में यात्री ईवी की बिक्री ने भारी उछाल देखा गया है। मार्च, 2026 में रिकॉर्ड 2.8 लाख से अधिक ईवी सभी प्रकार के वाहन पंजीकृत किए गए। वहीं 2026 की शुरुआत तक निजी कारों के कुल पंजीकृत वाहनों में ईवी की हिस्सेदारी लगभग 8.5 फीसदी से 10 फीसदी के बीच पहुंच गई है। जहां टाटा मोटर्स 43 फीसदी से अधिक बाजार हिस्सेदारी के साथ ईवी बाजार में शीर्ष पर बनी हुई है, जबकि महिंद्रा और एमजी मोटर तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं। वहीं वर्ष, 2026-2028 के बीच 27 से अधिक नई इलेक्ट्रिक कारें लॉन्च होने की उम्मीद है। मार्च, 2026 तक भारत में सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन 29,000 के आंकड़े को पार कर चुके हैं, जो मुख्य रूप से शहरों और प्रमुख राजमार्गों पर केंद्रित हैं।

