नई दिल्ली,
देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार कोयला खदानों की वाणिज्यिक नीलामी का 15वां चरण शुरू करने जा रही है। कोयला मंत्रालय ने शुक्रवार को मुंबई में इस नीलामी प्रक्रिया के साथ ही हितधारकों के साथ विचार-विमर्श कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है। सरकारी बयान के अनुसार, इस कार्यक्रम में कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त भी शामिल होंगे। यह 15वां चरण कोयला क्षेत्र में सुधारों की निरंतर प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें उद्योगों को आसान शर्तों पर खदानें उपलब्ध कराकर निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा और व्यापार करने की सुविधा को मजबूत किया जाएगा।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य देश को सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा उपलब्ध कराना है, साथ ही इस क्षेत्र में टिकाऊ विकास, नवाचार और दीर्घकालिक स्थिरता को बढ़ावा देना भी है। इस चरण में पूरी तरह से खोजी गई और आंशिक रूप से खोजी गई कोयला खदानों का नया सेट पेश किया जाएगा। इसमें अनुभवी खनन कंपनियों के साथ-साथ नए निवेशकों और तकनीक आधारित उद्यमों को भाग लेने का अवसर मिलेगा। सरकार को उम्मीद है कि यह पहल कोयला क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगी और निवेश को आकर्षित करेगी। इसके साथ ही रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पूरे क्षेत्र में विकास को गति मिलेगी।
साल 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वाणिज्यिक कोयला खनन की शुरुआत के बाद से देश में कोयले की उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिली है। मंत्रालय के अनुसार, इस नीलामी व्यवस्था ने कोयला क्षेत्र में पारदर्शिता लाई है, प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया है और सभी भागीदारों के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए हैं। वाणिज्यिक कोयला खनन अब आर्थिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। इससे कोयला उत्पादन में वृद्धि हुई है और देशभर के उद्योगों को नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हुई है। आगामी 15वां चरण इसी मजबूत आधार को आगे बढ़ाते हुए क्षेत्र में विश्वास को और मजबूत करेगा और भविष्य की संभावनाओं को नई दिशा देगा।

