New Delhi,
देश में उन्नत तकनीक आधारित उद्योगों को मजबूती देने के उद्देश्य से भारी उद्योग मंत्रालय ने घरेलू स्तर पर रेयर अर्थ स्थायी मैग्नेट निर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। सरकार ने इसके लिए औपचारिक प्रक्रिया के तहत निविदा दस्तावेज जारी कर दिए हैं, जिससे इच्छुक कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश कर सकें। मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत देश में समेकित रूप से सिंटरड रेयर अर्थ स्थायी मैग्नेट निर्माण सुविधाएं स्थापित की जाएंगी, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष होगी। यह कदम भारत को इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
यह योजना नवंबर 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत की गई थी, जिसमें कुल 7,280 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत चयनित लाभार्थियों को 600 से 1,200 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की क्षमता आवंटित की जाएगी। सरकार इस योजना के तहत उद्योगों को आकर्षित करने के लिए 750 करोड़ रुपये तक की पूंजी सहायता प्रदान करेगी। इसके अतिरिक्त, बिक्री से जुड़ी प्रोत्साहन राशि के रूप में 6,450 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है। साथ ही, शुरुआती तीन सबसे कम बोली लगाने वाले प्रतिभागियों को इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड द्वारा सीमित मात्रा में आवश्यक कच्चे पदार्थ की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
इस प्रक्रिया के तहत इच्छुक कंपनियां भारत में इन निर्माण इकाइयों को स्थापित करने के लिए आवेदन कर सकती हैं और उन्हें पूंजी सहायता तथा प्रोत्साहन लाभ प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। पूरी निविदा प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से पारदर्शी प्रणाली के तहत पूरी की जाएगी, जिसमें तकनीकी और वित्तीय दोनों चरण शामिल होंगे। सरकार ने बताया कि निविदा दस्तावेज 20 March 2026 से उपलब्ध हैं। पूर्व-निविदा बैठक 7 April 2026 को आयोजित की जाएगी, जबकि अंतिम तिथि 28 May 2026 निर्धारित की गई है। तकनीकी प्रस्तावों को 29 May 2026 को खोला जाएगा।
यह देश की पहली ऐसी व्यापक योजना है, जिसका उद्देश्य रेयर अर्थ मैग्नेट के निर्माण की पूरी श्रृंखला को भारत में विकसित करना है। इससे न केवल घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति भी मजबूत होगी। रेयर अर्थ स्थायी मैग्नेट दुनिया के सबसे शक्तिशाली मैग्नेट में शामिल होते हैं और इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन ऊर्जा उपकरणों, उच्च स्तरीय इलेक्ट्रॉनिक्स, अंतरिक्ष तथा रक्षा प्रणालियों में व्यापक रूप से किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना के लागू होने से इस क्षेत्र में आयात पर निर्भरता में बड़ी कमी आएगी और देश में उन्नत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा।

