भोपाल,
मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य की वित्तीय व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 6वें राज्य वित्त आयोग का गठन किया है। यह आयोग राज्य के शहरी निकायों और ग्राम पंचायतों की आर्थिक संरचना को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी के.के. सिंह को सदस्य और वीरेन्द्र कुमार को सदस्य सचिव बनाया गया है। अन्य सदस्यों की नियुक्ति अलग से की जाएगी।
यह आयोग राज्य सरकार और स्थानीय संस्थाओं जैसे ग्राम पंचायतों और नगर निकायों के बीच वित्तीय संसाधनों के वितरण को लेकर महत्वपूर्ण सिफारिशें करेगा। इसके तहत यह तय किया जाएगा कि कर, शुल्क, टोल और अन्य आय के स्रोतों का बंटवारा किस प्रकार किया जाए ताकि स्थानीय निकायों को पर्याप्त संसाधन मिल सकें। आयोग का कार्यकाल इस वर्ष 31 अक्टूबर तक निर्धारित किया गया है, हालांकि आवश्यकता पड़ने पर इसे बढ़ाया भी जा सकता है। आयोग आगामी वित्त वर्ष के लिए अपनी सिफारिशें राज्यपाल को 31 अक्टूबर तक सौंपेगा।
आयोग का मुख्य कार्य पंचायतों और नगर निकायों की वर्तमान वित्तीय स्थिति की समीक्षा करना होगा। इसके साथ ही यह स्थानीय निकायों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक सुधारों और उपायों की भी सिफारिश करेगा। राज्य में बढ़ती आधारभूत संरचना और नागरिक सेवाओं की मांग को देखते हुए आयोग की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। पानी की आपूर्ति, स्वच्छता, सड़कें और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सेवाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आयोग की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
इसके अलावा, आयोग स्थानीय स्तर पर प्रशासन को अधिक सशक्त बनाने के लिए वित्तीय प्रबंधन और शासन व्यवस्था में सुधार के सुझाव भी देगा। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम स्थानीय स्वशासन को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आयोग की सिफारिशों से यह तय होगा कि गांवों और शहरों तक संसाधनों का वितरण कितनी प्रभावी तरीके से होता है, जिससे राज्य के समग्र विकास को नई दिशा मिल सकेगी।

