वैश्विक उथल-पुथल होने के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था निरंतर आगे बढ़ रही है। जहां चीन और भारत अब दुनिया की ग्रोथ में सबसे ज्यादा योगदान दे रहे हैं। वर्ष, 2026 में चीन ने ग्लोबल जीडीपी ग्रोथ में 26.6 फीसदी और भारत का योगदान 17 फीसदी है। दोनों देश मिलकर दुनिया की कुल आर्थिक बढ़ोतरी का 43.6 फीसदी हिस्सा चला रहे हैं। वहीं भारत की अर्थव्यवस्था में पिछले पांच वर्षों में काफी प्रगति हुई है। वर्ष, 2023-24 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही, जो जी20 देशों में सबसे तेज है। भारत की आईटी उद्योग वर्ष, 2026 तक 350 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। वहीं पीएलआई स्कीम के तहत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में एफडीआई में 76 फीसदी की वृद्धि हुई है। वैश्विक स्तर पर छाई मंदी और निरंतर प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद वित्त वर्ष, 2026 की पहली छमाही में औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आई है। महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि सितंबर, 25 में विशिष्ट निवेशकों की संख्या 12 करोड़ आंकड़े को पार कर गई, जिनमें लगभग एक-चौथाई महिलाएं थीं। वहीं म्युचुअल फंड उद्योग का भी विस्तार हुआ है। गिफ्ट सिटी में स्थित भारत का पहला अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र, वैश्विक पूंजी को आकर्षित करने और उसे सही दिशा प्रदान करने के लिए सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रहा है। वैश्विक वस्तु निर्यात में भारत की साझेदारी एक प्रतिशत से लगभग दोगुनी होकर 1.8 प्रतिशत हो गई है, जबकि वैश्विक वाणिज्यिक सेवा निर्यात में इसकी साझेदारी दो प्रतिशत से बढक़र दोगुनी से अधिक यानी 4.3 प्रतिशत हो गई है। वहीं जल जीवन मिशन के तहत, अक्टूबर, 2025 तक 81 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण परिवारों के पास नल से स्वच्छ जल की सुविधा उपलब्ध की गई है। अंतरिक्ष अवसंरचना में तेजी आई है, जिसके तहत भारत स्वायत्त सैटेलाइट डॉकिंग की उपलब्धि प्राप्त करने वाला विश्व का चौथा देश बन गया है। इसके अलावा स्वदेशी मिशनों का विस्तार हुआ है और निजी क्षेत्र की साझेदारी में भी वृद्धि हुई है। इसी तरह वर्ष,2026में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) को प्राथमिकता दी गई है। इसका संकेन्द्र भारत की संरचनात्मक वास्तविकताओं जैसे पूंजी की उपलब्धता, ऊर्जा की सीमित आपूर्ति, संस्थागत क्षमता और बाजार की गहराई के अनुरूप ए.आई को अपनाने पर है।

