भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर होने वाली आधिकारिक बैठक को फिलहाल टाल दिया गया है। यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि दोनों देश हाल ही में आए Supreme Court of the United States के फैसले के प्रभावों का अध्ययन कर सकें। इस फैसले में Donald Trump प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ बढ़ोतरी को निरस्त कर दिया गया था।
दोनों देशों के मुख्य व्यापार वार्ताकारों के नेतृत्व में तीन दिन की बैठक पहले 23February से अमेरिका में प्रस्तावित थी। इस बैठक में अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने पर चर्चा होनी थी, लेकिन अब नई परिस्थितियों को देखते हुए इसे आगे बढ़ा दिया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार भारतीय प्रतिनिधिमंडल की वाशिंगटन यात्रा अब तब होगी जब दोनों पक्ष न्यायालय के फैसले से उत्पन्न स्थितियों का पूरा विश्लेषण कर लेंगे। बैठक की नई Date दोनों देशों की सहमति से तय की जाएगी। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने न्यायालय के फैसले के बाद भी वैश्विक टैरिफ दर को 10प्रतिशत से बढ़ाकर 15प्रतिशत करने की घोषणा कर दी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर कहा कि यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू होगा और इसका उद्देश्य उन देशों पर सख्ती करना है जो लंबे समय से अमेरिका के साथ व्यापार में अनुचित लाभ उठा रहे थे।
इससे पहले Supreme Court of the United States ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए व्यापक आयात शुल्क संवैधानिक अधिकारों की सीमा से बाहर थे। न्यायालय ने माना कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत इतनी व्यापक टैरिफ नीति लागू करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायालय के इस फैसले से ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए कई टैरिफ अमान्य हो गए हैं, हालांकि कुछ शुल्क अभी भी लागू रह सकते हैं। फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि उनके पास वैकल्पिक योजना भी तैयार है।
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौता दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस समझौते के माध्यम से निर्यात, आयात और टैरिफ से जुड़े कई मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की जा रही है। न्यायालय के फैसले और नए टैरिफ के कारण अब दोनों देशों को समझौते की शर्तों पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका में टैरिफ नीति में बड़ा बदलाव होता है तो इसका असर भारत के निर्यात क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि दोनों देशों ने जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय विस्तृत अध्ययन के बाद आगे बढ़ने का फैसला किया है।




