Indiaऔर Brazilके बीच डाक सेवाओं में सहयोग बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण MoU पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ डाक व्यवस्था के आधुनिकीकरण और Digital Transformation को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यह जानकारी Ministry Of Communications की ओर से रविवार को दी गई।
इस MoU पर भारत के संचार मंत्री Jyotiraditya M. Scindia और ब्राज़ील के संचार मंत्री Frederico De Siqueira Filho ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता ब्राज़ील के राष्ट्रपति Luiz Inacio Lula Da Silva की भारत यात्रा के दौरान संपन्न हुआ। इस समझौते के माध्यम से भारत के डाक विभाग और ब्राज़ील के संचार मंत्रालय के बीच सहयोग का एक व्यापक ढांचा तैयार किया गया है। समझौते का मुख्य उद्देश्य डाक सेवाओं में सुधार, नई तकनीकों का उपयोग और आम नागरिकों तक सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाना है। इसके तहत दोनों देश डाक नीतियों और संचालन से जुड़े अपने अनुभव और सर्वोत्तम तरीकों को एक-दूसरे के साथ साझा करेंगे। साथ ही सार्वभौमिक सेवा दायित्व को मजबूत करने और पते से संबंधित व्यवस्थाओं को अधिक सटीक बनाने पर भी काम किया जाएगा।
MoU के अंतर्गत Digital Transformation, ई-कॉमर्स वितरण और डाक वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाया जाएगा। बदलते वैश्विक बाजार में इन सेवाओं का महत्व तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए दोनों देश आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विशेष ध्यान देंगे। भारत बड़े स्तर पर किए गए डाक सुधारों का अपना अनुभव साझा करेगा, विशेष रूप से Digital सेवाओं और नागरिक केंद्रित योजनाओं के संचालन में। यह साझेदारी डाक नेटवर्क की कार्यक्षमता बढ़ाने और उनकी आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने में भी सहायक मानी जा रही है। इसके अलावा प्रशिक्षण कार्यक्रमों, अधिकारियों के आदान-प्रदान और संयुक्त कार्यशालाओं के माध्यम से क्षमता निर्माण पर भी जोर दिया जाएगा। दोनों देश आपसी हित के महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर नियमित रूप से जानकारी साझा करेंगे।
दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है, जिसमें विशेष रूप से Universal Postal Union शामिल है। इस सहयोग के माध्यम से वैश्विक स्तर पर डाक सेवाओं के विकास में योगदान देने की योजना है। यह MoU पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा और तय प्रावधानों के अनुसार स्वतः नवीनीकरण की व्यवस्था भी रहेगी। इसे दोनों देशों के प्रचलित कानूनों के अनुसार लागू किया जाएगा। इस समझौते को आर्थिक विकास, वित्तीय समावेशन और अंतिम छोर तक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।




