केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के कारण भारत के वस्त्र उद्योग में इस वर्ष बढ़ोतरी देखने को मिली है। सरकार ने राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (एनटीटीएम) की शुरुआत कर अच्छी पहल की है, जिसमें 1,480 करोड़ रुपए का निवेश होगा। इस मिशन का उद्देश्य तकनीकी वस्त्र के उपयोग को बढ़ाना और इसे रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रमोट करना है। वहीं भारत के वस्त्र क्षेत्र ने वर्ष, 2025 में निवेश और निर्यात में भारी वृद्धि दर्ज की है, जिसे सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं और व्यापार में आसानी के लिए किए गए आर्थिक सुधारों से बल मिला है। इस वर्ष भारत का वस्त्र उद्योग उच्च स्तरीय कपड़ों और स्मार्ट टेक्सटाइल्स की बढ़ती मांग, सरकार की पहल, जैसे कि पीएलआई योजना और एटीयूएफएस, जो वस्त्र उद्योग को बढ़ावा दे रही हैं और सस्टेनेबल और ऑर्गेनिक कपड़ों की बढ़ती मांग के कारण बढ़ रहा है। आने वाले समय में भारत का वस्त्र उद्योग और भी प्रगति करेगा। इनमें टेक्निकल टेक्सटाइल्स का बाजार वर्ष, 2026 तक 45 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। ऑटोमोटिव टेक्सटाइल्स का बाजार वर्ष, 2033 तक 4.57 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। वहीं सस्टेनेबल टेक्सटाइल्स की मांग बढऩे से उद्योग को लाभ होगा। सरकार ने विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस 7 पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (पीएम मित्र) पार्कों के निर्माण को भी मंजूरी दी है, जिनमें प्लग एंड प्ले सुविधा भी शामिल है। इन पार्कों के लिए बजट तय किया गया है। ये पार्क तमिलनाडु, तेलंगाना, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में बनेंगे। ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने भी निर्यात में 20 प्रतिशत योगदान किया है। सरकार ने वस्त्र क्षेत्र में जीएसटी की दर को 5 प्रतिशत कर दी है, जो पहले 12 प्रतिशत थी। यह कदम निर्यात को बढ़ावा देने और कला कारीगरों की मदद करने के लिए उठाया गया है। वस्त्र व्यापार संवर्धन (टीटीपी) विभाग ने भी भारत की वैश्विक वस्त्र बाजार में उपस्थिति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।

