Monday, July 27, 2026 |
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यूके-भारत द्विपक्षीय व्यापार हर साल £25.5 बिलियन/3.01 ट्रिलियन रुपए तक बढऩे की उम्मीद: स्टीफन हिकलिंग

फिक्की राजस्थान और सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ ने आयोजित किया सेमिनार

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज़/जयपुर। इस वर्ष जुलाई में साइन किया गया ‘यूके-इंडिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’, दोनों देशों के आपसी रिश्तों में एक एतिहासिक मील का पत्थर है। यह भारतीय व्यवसायों के लिए विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसरों के द्वार खोलता है, जिसमें कम टैरिफ, ज़्यादा मोबिलिटी और स्ट्रेटेजिक सहयोग मिलता है। दीर्घकालिक रूप से, द्विपक्षीय व्यापार में हर साल £25.5 बिलियन की वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे दोनों देशों की जीडीपी को बढ़ावा मिलेगा। यह अब तक का सबसे व्यापक समझौता है जिसे भारत ने स्वीकार किया है, और यूरोपीय संघ (ईयू) से बाहर निकलने के बाद यह यूके का सबसे महत्वाकांक्षी समझौता है। यह बात डिप्टी हाई कमिश्नर टू गुजरात एंड राजस्थान, ब्रिटिश डिप्टी हाई कमिशन, स्टीफन हिक्लिंग ने आज जयपुर में ‘इंडिया-यूनाइटेड किंगडम कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट’ थीम पर आयोजित सेमिनार में कीनोट संबोधन के दौरान कही। कार्यक्रम का आयोजन फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) राजस्थान स्टेट काउंसिल द्वारा सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ (सीटीआईएल) के सहयोग से किया गया था। सेमिनार की थीम ‘अनलॉकिंग राजस्थान एक्सपोर्ट पोटेंशियल’ थी।
इस समझौते से होने वाले मुख्य आर्थिक लाभों को रेखांकित करते हुए, हिक्लिंग ने बताया कि भारत से यूके को होने वाले 99त्न निर्यात अब ड्यूटी फ्री होंगे, जिससे टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, कृषि और फार्मास्युटिकल्स क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिलेगा। छोटे और मध्यम उद्यमों तथा स्टार्टअप्स को सरल अनुपालन प्रक्रियाओं और यूके के खरीदारों एवं निवेशकों तक बेहतर पहुंच का लाभ मिलेगा। सर्विस प्रोफेशनल्स को वीजा प्रक्रियाओं में आसानी और तीन साल तक यूके की सामाजिक सुरक्षा योगदान से छूट जैसे लाभ मिलेंगे।
राजस्थान सरकार के कौशल, रोजगार और उद्यमिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, संदीप वर्मा ने कहा कि उद्योग जगत के हितधारकों के बीच सतत संवाद की संस्कृति को बढ़ावा देना आवश्यक है, ताकि बदलती हुई कौशल आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझा जा सके।
राजस्थान सरकार के खेल और युवा मामलों के सचिव, डॉ. नीरज के. पवन ने राजस्थान में स्पोर्ट्स और स्पोर्ट्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में मौजूद अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने सुझाव दिया कि यूनाइटेड किंगडम की यूनिवर्सिटीज राजस्थान में आउटरीच प्रोग्राम या सेंटर खोलने पर विचार कर सकती हैं, क्योंकि यह भारत का सबसे बड़ा राज्य है और यहां भरपूर भूमि एवं संसाधन उपलब्ध हैं।
राजस्थान सरकार के उद्योग और वाणिज्य आयुक्त, रोहित गुप्ता ने कहा कि राजस्थान उन कुछ राज्यों में से है जिनके पास एक समर्पित एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी है, जिसमें नई नोटिफाई की गई राजस्थान एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी, 2024 भी शामिल है, जिसे सेक्टर-स्पेसिफिक फ्रेमवर्क द्वारा समर्थन प्रदान किया गया है। उन्होंने बताया कि राजस्थान इन्वेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम (आरआईपीएस) और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) पॉलिसी नए मार्केट में एंट्री करने की चाहत रखने वाली कंपनियों को पूरी मदद देती हैं। ओडीओपी पहल खास तौर पर हर जिले के लिए एक खास प्रोडक्ट की पहचान करती है,और उस प्रोडक्ट को ब्रांडिंग, वैल्यू-चेन में सुधार, इंफ्रास्ट्रक्चर और एक्सपोर्ट प्रमोशन में मदद करती है, जबकि आरआईपीएस इन्वेस्टमेंट और कॉम्पिटिटिवनेस को बढ़ावा देने के लिए फाइनेंशियल इंसेंटिव और अन्य सुविधा प्रदान करती है।
इंडियन इन्स्टिट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड (आईआईएफटी) के कुलपति, डॉ. राकेश मोहन जोशी ने इस व्यापार समझौते को एक ‘गेम चेंजर’ बताया, जो भारत के निर्यात परिदृश्य को पूरी तरह से नया रूप दे सकता है।
सेंटर फॉर ट्रेड एंड इनवेस्टमेंट लॉ (ष्टञ्जढ्ढरु) के वरिष्ठ रिसर्च फेलो, रिधिश राजवंशी ने सेमिनार का संदर्भ प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह समझौता राजस्थान के उद्योगों, विशेषकर टेक्सटाइल और हस्तशिल्प के लिए एक सशक्त माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि भारत-यूके समझौते के प्रभाव में आने के साथ ही, राजस्थान अब बिना किसी बिचौलिये या अतिरिक्त शुल्क बाधाओं के सीधे यूके के बाजार में निर्यात कर सकेगा। इससे राज्य के उद्योगों को अपने पूर्ण क्षमता तक विकसित होने का अवसर मिलेगा।
अपने स्वागत संबोधन में फिक्की राजस्थान स्टेट कौंसिल के सदस्य एवं इंसोलेशन एनर्जी लिमिटेड के चेयरमैन, मनीष गुप्ता ने कहा कि यह सेमिनार विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाने का अवसर बना है, जहां प्रस्तावित समझौते के तहत अवसरों, बाजार पहुंच, शुल्क उदारीकरण, अनुपालन आवश्यकताओं, तथा भविष्य की रूपरेखा पर विचार-विमर्श किया गया, जिससे राजस्थान के व्यापार और निर्यात को यूनाइटेड किंगडम की दिशा में प्रोत्साहन मिल सके। फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल के सदस्य एवं द्वारका जेम्स लिमिटेड के चेयरमैन, के. बी. गोयल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उद्घाटन सत्र का संचालन फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल के निदेशक एवं प्रमुख, अतुल शर्मा ने किया।



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